शिक्षा मंत्रालय के अवर सचिव ने यूजीसी को पत्र में लिखा कि सत्र 2024-25 के लिए छह प्रतिशत वार्षिक बढ़ोतरी के साथ 348.28 करोड़ फंड जारी करने और संशोधित वेतनमान के कारण देय लंबित एरियर के लिए 266.50 करोड़ जारी करने की मांग है। पीयू को पंजाब सरकार से बजट में बढ़ोतरी नहीं मिल रही है। इसलिए इस मसले पर विचार किया जाए। पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से पिछले हफ्ते ही बोर्ड ऑफ फाइनेंस की बैठक में भी केंद्र और पंजाब सरकार से संशोधित वेतनमान के लंबित एरियर जारी करने के लिए एक बार अतिरिक्त 278.17 करोड़ के अनुदान की मांग की गई थी।
इस दौरान चर्चा हुई थी कि शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी की तरफ से शिक्षकों की तनख्वाह में बढ़ोतरी के कारण सैलरी ग्रांट में वार्षिक छह प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 294.78 करोड़ से 346.07 करोड़ करने को लेकर सिफारिश की गई है। साथ ही पंजाब ने वार्षिक सैलरी ग्रांट में 85.37 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है।
सत्यपाल जैन ने पत्र लिखकर की थी अतिरिक्त ग्रांट की मांग
पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट के वरिष्ठ सदस्य और पूर्व सांसद सत्यपाल जैन की ओर से सितंबर के आखिरी हफ्ते में केंद्र सरकार को संस्थान को अतिरिक्त ग्रांट जारी करने को लेकर पत्र लिखा गया है। जैन की ओर से केंद्र से आग्रह किया गया था कि पीयू को 2023-24 की ग्रांट 294 करोड़ से बढ़ाकर 346 करोड़ जारी की जाए। इसके साथ ही भविष्य में इस पर हर वर्ष छह प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाए। इससे सातवें पे कमीशन की सिफारिशें लागू होने के बाद पीयू के कर्मचारियों को 1 जनवरी 2016 से बकाया एरियर जारी किया जा सके। शिक्षा मंत्रालय के पत्र के बाद पुटा की ओर से पीयू वाइस चांसलर प्रो. रेणु विग और उनकी टीम का इस संबंध में प्रयास करने के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही यूजीसी की ओर से सकारात्मक परिणाम के लिए आस व्यक्त की।