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पंजाब यूनिवर्सिटी के वीसी ने दिखाई पावर और पलट दिया सिंडिकेट का फैसला, डीएसडब्ल्यू प्रो. नाहर हटाए

Fri, 23 Aug 2019 10:58 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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pu ki synate ki baithak mein bahar nsui ke karyakarta pradarshan karte huve
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पंजाब विश्वविद्यालय सीनेट की बैठक में वीरवार को बड़ा निर्णय लिया गया। सीनेट के कई वरिष्ठ सदस्यों की राय लेने के बाद वीसी प्रो. राजकुमार ने सिंडिकेट का फैसला बदल दिया। डीएसडब्ल्यू प्रो. इमैनुअल नाहर, डीएसडब्ल्यू वुमन प्रो. नीना कप्लाश व एडीएसडब्ल्यू प्रो. रंजन कुमार को हटा दिया।
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उन्होंने कहा कि सिंडिकेट की बैठक में नए डीएसडब्लयू का प्रस्ताव एकराय के साथ लाया जाएगा। यह निर्णय लेते ही सीनेट के गोयल ग्रुप ने हंगामा शुरू कर दिया। वहीं पर 48 सदस्यों से हस्ताक्षर करवाकर पत्र दिया। उन्होंने डीएसडब्ल्यू के एक्सटेंशन की मांग की थी, लेकिन वीसी ने नहीं मानी। यही नहीं, इस ग्रुप ने हाउस में सांकेतिक धरना दिया और नारेबाजी भी की।

एनएसएस को-ऑर्डिनेटर के एक्सटेंशन से शुरू हुआ हंगामा
सीनेट की बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई। सबसे पहले एजेंडा फर्स्ट लाया गया। जैसे ही प्रस्ताव पांच आया तो प्रो. सिब्बल ने एनएसएस को-ऑर्डिनेटर के एक्सटेंशन से पहले लीगल राय लेने का सुझाव दिया। उसके बाद माहौल गर्म हो गया। डॉ. सुभाष शर्मा ग्रुप ने सवाल उठाए कि मेघालय आदि की डिग्रियां फर्जी निकली हैं। सीनेट में पहले भी ऐसे मामले आए हैं। जांच भी हुई है। कहा, को-ऑर्डिनेटर के कुछ अभिलेख भी वहीं से हैं। ऐसे में एक्सटेंशन नहीं दिया जाए।
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वहीं गोयल ग्रुप ने इसका विरोध किया। कहा कि एक्सटेंशन मिलना चाहिए। उन्होंने एनएसएस को-ऑर्डिनेटर की उपलब्धियां गिनाई। कई लोगों ने यह भी राय दी कि पीयू के पास फंड की कमी है। ऐसे में एक्सटेंशन नहीं दिया जाए। इस मामले को लेकर काफी विरोध होता रहा। दोनों ग्रुप आमने-सामने आ गए। हाथापाई जैसी नौबत आ गई, लेकिन मामला शांत कर दिया गया। आखिर में वीसी ने निर्णय सुना दिया कि कानूनी राय लेने के बाद ही वह को-ऑर्डिनेटर का एक्सटेंशन होगा।

 
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स्टूडेंट सेंटर की दुकानें बिना टेंडर के दे दी गईं

विरोध प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
बात एजेंडा नंबर सात पर आई। इस एजेंडे का पहले विरोध दर्ज कराया गया। कहा कि जब सिंडिकेट में डीएसडब्ल्यू के नामों पर एकराय नहीं थी तो यहां क्यों लाया गया, इसे होल्ड किया जाए। डॉ. सुभाष शर्मा, वीरेंद्र गिल आदि ने कहा कि पूर्व वीसी के समय में डीएसडब्ल्यू इमैनुअल नाहर को तीन माह का एक्सटेंशन दिया गया था, जबकि नौ माह कार्यकाल और बढ़ा दिया गया। तीन बार लगातार किसी को एक्सटेंशन नहीं दी जानी चाहिए।

डॉ. सुभाष शर्मा ने स्टूडेंट सेंटर के नीचे बनी दुकानों के मामले को भी इसी मामले से जोड़ दिया। उसके बाद हंगामा तेज हो गया। गोयल ग्रुप ने नियमों का हवाला दिया। उसके बाद बार-बारी से वीसी ने 30 सदस्यों से राय ली। गोयल ग्रुप के 48 सदस्यों ने लिखित पत्र दिया कि वह प्रो. नाहर का एक्सटेंशन चाहते हैं। सभी ने राय दी और उसके बाद वीसी ने कहा, सीनियर सदस्यों के मुताबिक डीएसडब्ल्यू का एक्सटेंशन नहीं किया जा सकता। सिंडिकेट में प्रस्ताव लाया जाएगा और नए डीएसडब्ल्यू बनाए जाएंगे। इसी निर्णय के साथ लंच की घोषणा हो गई।

गोयल ग्रुप ने लंच का बहिष्कार किया, वीसी ने नहीं बदला अपना निर्णय
लंच की घोषणा के बाद गोयल ग्रुप ने खाने का बहिष्कार किया। लंच के बाद फिर से बैठक शुरू हुई। वीसी जैसे ही आए तो उन्होंने एजेंडा नंबर आठ पर विचार मांगे। एक सीनेटर ने विचार रखने शुरू किए कि दूसरे ग्रुप ने फिर से डीएसडब्ल्यू एक्सटेंशन का मामला उठा दिया। वीसी ने इस एजेंडे पर बात करने से मना कर दिया। उसके बाद गोयल ग्रुप की ओर से नारेबाजी शुरू हो गई। कहा कि वीसी ने लोकतंत्र की हत्या की है। यह तानाशाही है, लेकिन वीसी विचलित नहीं हुए और उन्होंने दस प्रस्तावों को पास कर दिया और बैठक समाप्त करने की घोषणा कर दी।

नारेबाजी हो रही थी कि राष्ट्रगान शुरू हो गया, एक बार बीच में बंद हो गया, लेकिन बाद में फिर शुरू हुआ। राष्ट्रगान जैसे ही खत्म हुआ तो सभी चले गए। इसके विरोध में सीनेटर नारेबाजी करते रहे। वीसी पर आरोप लगाते रहे।
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