चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के सीनेट चुनाव तो होंगे, लेकिन रिफार्म के साथ। इसके संकेत केंद्र सरकार ने पीयू को दे दिए हैं। इस पर अंतिम निर्णय होने में अभी एक माह का समय लग जाएगा, क्योंकि इस समय सरकार किसानों के आंदोलन को शांत करने में जुटी है। जैसे ही आंदोलन को खत्म होगा तो पीयू की सीनेट को लेकर निर्णय हो जाएगा।
किसी भी यूनिवर्सिटी के उच्च सदन को खत्म करने का अधिकार गृह मंत्रालय के पास ही होता है। बोर्ड ऑफ गवर्नेंस भी बनता है तो उसका नोटिफिकेशन भी गृह मंत्रालय ही करता है। सूत्रों का कहना है कि इस समय किसानों का आंदोलन चल रहा है। पूरी सरकार उसी आंदोलन को शांत करने में जुटी है। दूसरे बड़े निर्णयों की ओर अभी कम ध्यान है। गृह मंत्रालय को ही सीनेट रिफॉर्म का नोटिफिकेशन जारी करना है। जानकार बताते हैं कि जनवरी माह इसी कार्य में लग जाएगा। ऐसे में जनवरी में सीनेट का रिफॉर्म होना संभव नहीं दिख रहा। रिफॉर्म के बाद ही सीनेट के चुनाव होंगे। रिफार्म भी इस तरह किया जा सकता है कि अधिक से अधिक कैंपस शिक्षकों को इसमें जगह मिल सके। किसी दल या गुट का वर्चस्व इसमें न रह सके। स्नातक वर्ग की सीटों की संख्या में कटौती करने की तैयारी चल रही है।
पूरी प्रक्रिया में लग सकते हैं चार माह
सूत्रों का कहना है कि सीनेट रिफॉर्म से लेकर चुनाव करवाने आदि की प्रक्रिया में कम से कम चार माह लग सकते हैं। तब तक पीयू के हर निर्णय सीनेट व सिंडिकेट के अध्यक्ष के रूप में वीसी ही लेंगे। सीनेट में कितने सदस्य रहेंगे? यह फाइनल नहीं हो पा रहा है। बाहरी कितने लोग सीनेट में आएंगे? पंजाब का कितना इसमें दखल होगा? यह सब तय होगा। सूत्रों का कहना है कि इसका कच्चा खाका तैयार हो गया है। यह केंद्र सरकार के जिम्मेदारों को बताया जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद नोटिफिकेशन जारी होगी।
सिंडिकेट का ढांचा भी बदलेगा
सीनेट का रिफॉर्म होने के बाद सिंडिकेट का ढांचा भी बदलेगा। सिंडिकेट एक समिति की तरह बनाए जाने की तैयारी चल रही है। सूत्रों का कहना है कि इसके सदस्यों का चुनाव न होकर सीनेट की ओर से सीधे सदस्यों को मंजूरी दिए जाने की तैयारी है। सदस्यों की संख्या इसमें सात हो सकती है। यह समिति शिक्षकों की ही होगी जो कैंपस में काफी समय से कार्यरत होंगे। सूत्रों ने यह भी बताया है कि सीनेट के सदस्य सिंडिकेट में शामिल नहीं होंगे। हालांकि यह मांग पहले भी उठाई गई थी, लेकिन ऐसा हुआ तो पीयू के सदनों में होने वाली राजनीति कम हो जाएगी।