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पीयू मेरी वह महबूबा है जिसे मैं मुंबई नहीं ले जा सकता : इरशाद कामिल

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में आयोजित चंडीगढ़ भाषा कांग्रेस के दूसरे दिन कवि व शायरों ने अपने दिल की बात युवाओं के सामने रखी। मुल्क राज ऑडिटोरियम में जहां कवि पद्मश्री सुरजीत पातर की कविताओं ने सभी को मंत्रमुग्ध किया वहीं वॉलीबुड के प्रसिद्ध गीतकार व पीयू के पूर्व छात्र इरशाद कामिल ने कैंपस से सीखे जीवन के पाठ के बारे में अवगत कराया। पीयू की उनके जीवन में क्या अहमियत है पूछे जाने पर इरशाद कामिल बोले, ‘पीयू उनकी वह महबूबा है जिसे वह मुंबई नहीं ले जा सकते।’ हिंदी विभाग अध्यक्ष डॉ. अशोक ने इरशाद से उनके पीयू के दिनों के बारे में पूछा। इरशाद ने बताया वह हॉस्टल- 5 के ए ब्लॉक के 41 नंबर कमरे में वह रहा करते थे। 300 विद्यार्थियों के हॉस्टल में उन्हें अलग-अलग तरह के लोगों को समझने का मौका मिला। हॉस्टल में बढ़े इस दायरे के तहत ही वह किरदारों के लिए गाने लिख पाए। चाहे रॉकस्टार फिल्म में जॉर्डन के लिए लिखा गीत हो या जब हैरी मेट सेजल के किरदार के लिए लिखे गाने, उनके बीज हाॅस्टल में ही डले हैं। उन्हें स्वयं को कवि कहलाना पसंद है, पूछे प्रश्न के जवाब पर इरशाद बोले- ‘कविता खुद के लिए लिखता हूं और गीत किरदार, निर्देशक की बताई धुन और प्रोड्यूसर के लिए।’ युवाओं को अपना दोस्त बताने हुए वह बोले कि वह उनके साथ ज्यादा से कनेक्ट करना चाहते हैं।
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पद्मश्री सुरजीत पातर बोले-पंजाब के मुद्दे मेरे वजूद में हैं जिसका असर मेरी कविताओं में दिखता है
सत्र के दौरान पूछे एक प्रश्न के जवाब में सुरजीत पातर ने कहा कि पंजाब के मुद्दे मेरे वजूद का हिस्सा हैं। इसका असर मेरी कविताओं में दिखता है। पंजाब में प्रवास से लेकर पंजाबी भाषा की स्थिति आदि कई मुद्दे हैं जिस पर वह कविताएं लिख चुके हैं। पंजाबी विभाग अध्यक्ष प्रो. योगराज ने सम्मेलन में सुरजीत पातर के सत्र में संचालक की भूमिका निभाई। सुरजीत पातर ने नौर रस पर लिखी जाने वाली कविताओं में से दुख और आश्चर्य से भरी कविताओं को सबसे श्रेष्ठ बताया जो उन्हें खुद को भाती है। उनकी कविताओं में झलकती पंजाब की समस्याओं और मुद्दों पर पूछे प्रश्न पर वह बोले कि कवि वह सब लिखता है जो वह महसूस करता है और अपने आस-पास देखता है। कविता कवि की कशीद की हुई आत्मकथा होती है। पीयू के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया वह दाखिला लेने के लिए चंडीगढ़ में पंजाब यूनिवर्सिटी आए थे लेकिन यहां विद्यार्थियों की टौहर देखकर वह डर गए और पटियाला में पंजाबी यूनिवर्सिटी में जाकर दाखिला ले लिया। युवाओं को देखकर बोले, ‘अगर उस समय टौहर न दिखाई होती तो मैं आज पीयू का विद्यार्थी होता।’
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