चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय की फाइलें बड़ी संख्या में हर्बल गार्डन में फेंक दी गई। झाड़ीदार पेड़ों के बीच में फाइलें अटकी हैं। ये फाइलें हाल ही में फेंकी गई हैं, क्योंकि इन पर किसी तरह धूल या गंदगी नहीं चढ़ी हुई है। जिसको भी पता लगा वह फाइलों को देखने पहुंच रहा है। रविवार को भी कई लोग यहां फाइलों को देखने पहुंचे कि उनके विभाग की तो नहीं हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यह फाइल कवर हैं, लेकिन नए सरकारी फाइल कवर को भी ऐसे नहीं फेंका जा सकता। पीयू के अधिकारियों तक कुछ लोगों ने मामला पहुंचाया है। वे इसकी जांच की तैयारी कर रहे हैं।
पीयू के प्रशासनिक ब्लॉक के सामने हर्बल गार्डन बना हुआ है। यहां बड़ी संख्या में औषधीय पौधे हैं। लोग इस पार्क में सुबह से लेकर शाम को टहलते हैं। पीयू के कर्मचारी व शिक्षक भी घूमते हैं। दोपहर में लोग यहां खाना भी खाते नजर आते हैं। रविवार को अचानक पीयू के इस पार्क में लोगों की भीड़ दिखने लगी। पता लगा कि एक झाड़ीदार पेड़ में बड़ी संख्या में पीयू की फाइलें पड़ी हैं। उन फाइलों के अंदर कागज हैं या नहीं, यह कोई नहीं देख रहा, क्योंकि उनको हाथ लगाने से लोग डर रहे हैं। कुछ शिक्षकों का कहना है कि फाइल हों या उनके कवर। इन्हें ऐसे नहीं फेंका जाना चाहिए था। यह फाइलें बिल्कुल नई हैं। इस प्रकरण की जांच हो और संबंधित व्यक्ति पर कार्रवाई होनी चाहिए। कुछ शिक्षकों ने यह मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया।
परिसर में जगह-जगह पड़ी हैं शराब व बीयर की खाली बोतलें
पीयू कैंपस शिक्षा का मंदिर है। यहां सफाई विशेष रूप से होनी चाहिए। यहां बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी भी तैनात किए गए हैं, लेकिन परिसर में जगह-जगह शराब व बीयर की खाली बोतलें पड़ी हैं। हर्बल गार्डन में ही कई बोतलें दिखीं। इसके अलावा एसी जोशी पुस्तकालय के सामने बने लॉन में भी बोतलें पड़ी हैं। स्टूडेंट सेंटर के आसपास भी बोतलें फेंकी गई हैं। शिक्षकों का कहना है कि पीयू अभी खुली नहीं हैं। बाहरी लोगों का प्रवेश बंद किया गया है, इसके बाद यहां शराब की खाली बोतलें कहां से आ रही हैं। उन्होंने कहा कि इस पर ध्यान देना चाहिए। छात्रावासों के आसपास भी बोतलें पड़ी दिखीं। कुछ लोगों का कहना है कि शाम होते ही बाहरी गाड़ियां पीयू में प्रवेश करती हैं। उन्हें प्रवेश द्वारों पर नहीं रोका जाता। सूत्रों का कहना है कि कुछ लोग गाड़ियों में बैठकर शराब पीते हैं तो कुछ बाहर आकर। बोतलें वहीं फेंक देते हैं। इस प्रकरण को पीयू को गंभीरता से लेना चाहिए।