चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी ने विद्यार्थियों से परीक्षा शुल्क ले लिया है। अब परीक्षाएं जुलाई में ऑनलाइन करवाने की तैयारी चल रही है। छात्रों का कहना है कि ऑनलाइन परीक्षा घर से ही होगी। ऐसे में उत्तर पुस्तिकाएं खरीदने व उसे डाक से भेजने पर जो रकम खर्च होगी, उसे पीयू को ही देना होगा। उन्होंने कहा है कि प्रति परीक्षा के लिए हर छात्र को 50 रुपये तक देने होंगे। यह रकम छात्रों के खातों में भेजी जाए।
कोरोना से पहले पीयू की ओर से ऑफलाइन परीक्षाएं आयोजित की जाती रही हैं। उसके लिए उत्तर पुस्तिकाएं पीयू की ओर से मुहैया कराई जाती रही है। जैसे ही कोरोना आया तो पहली परीक्षा ऑनलाइन आयोजित की गई। इस परीक्षा के लिए प्रति छात्र 30 रुपये आवंटित किए गए ताकि छात्र उत्तर पुस्तिकाएं खरीद सकें और डाक आदि के जरिए वह भेज सकें। उसके बाद पीयू ने दो और परीक्षाएं ऑनलाइन आयोजित की, लेकिन उसके लिए रकम आवंटित नहीं की। इसका भार विद्यार्थियों पर पड़ा। इसके अलावा डाक से भेजने के लिए उन्हें दूरस्थ क्षेत्रों तक किराया आदि लगाकर जाना पड़ा। लद्दाख, कश्मीर के विद्यार्थियों को इस प्रक्रिया में काफी पसीना बहाना पड़ा।
क्या कहते हैं छात्र नेता
छात्रों से जब शुल्क लिया है तो पीयू को यह पहल करनी होगी। पहली परीक्षा की तर्ज पर छात्रों को रकम भेजनी चाहिए ताकि वह उत्तर पुस्तिकाएं खरीद सकें।
-निखिल नरमेटा, अध्यक्ष, एनएसयूआई
छात्रों की मांग जायज है। पीयू प्रशासन को यह पूरी करनी चाहिए। पीयू यदि सुविधा नहीं देती है तो छात्रों का शुल्क वापस किया जाना चाहिए।
-शुभम, मीडिया प्रभारी, एबीवीपी
ट्यूशन के अलावा जो शुल्क लिया, वह वापस हो
एबीवीपी ने मुद्दा उठाया है कि पीयू की ओर से ट्यूशन समेत कई मदों का शुल्क लिया गया है जबकि छात्रों ने वह सुविधाएं ली ही नहीं। ऐसे में पीयू वह शुल्क वापस ले। मीडिया प्रभारी शुभम का कहना है कि दिल्ली के नामचीन किरोड़ीमल कॉलेज ने यह पहल की है। विद्यार्थियों को ट्यूशन को छोड़कर बाकी शुल्क वापस कर दिया है। इससे पीयू को सीख लेनी चाहिए और शुल्क वापस किया जाए ताकि कोरोना काल में गरीबी झेल रहे परिवारों को इससे कुछ लाभ मिलेगा। पीयू जल्द से जल्द इस पर निर्णय ले।