चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में तैनात एग्जीक्यूटिव इंजीनियर सतीश पदम और सब डिवीजनल इंजीनियर नंदलाल से जुड़े रिश्वत मामले को सीबीआई की अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को भेजकर मामले में दोबारा ट्रालय शुरू करने की अनुमति मांगी है। मामले में हाईकोर्ट ने 2018 में स्टे लगाया था। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट से जजमेंट आने के बाद सीबीआई ने अदालत से मामले का ट्रायल फिर शुरू करने की मंजूरी मांगी थी इसीलिए मामले से संबधित विवरण हाईकोर्ट को भेजा गया है। अब हाईकोर्ट से नोटिस होने के बाद ही दोनों आरोपियों के खिलाफ ट्रायल शुरू होगा। यह मामला 2010 का है। 2 जनवरी 2012 को मामले का चालान पेश किया गया था। 16 जुलाई 2018 को मामले की बहस होनी थी, लेकिन उससे पहले ही 13 जुलाई को सतीश पदम हाईकोर्ट चला गया, जहां से उन्हें स्टे मिल गई। आज तक वह तारीख स्थगित नहीं हुई है। मामले की अगली सुनवाई 8 फरवरी 2021 को होगी।
बता दें कि कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला आया था, जिसमें कहा गया था कि जिन मामलों में किसी भी अदालत ने स्टे लगाई हुई है, वह 6 महीने के बाद अपने आप खत्म हो जाएगी। यदि स्टे को आगे बढ़ाना है तो उसके लिए सही और मजबूत कारण होने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि यह जजमेंट पूरे देश की अदालतों में लागू की जाए। इस जजमेंट के आने के बाद सीबीआई ने अदालत में आवेदन दायर कर मामले का ट्रायल दोबारा चलाने की मंजूरी मांगी थी। इस मामले में दो साल से स्टे लगी हुई है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार वह स्टे खत्म हो चुकी है। अब सीबीआई की विशेष अदालत ने मामले की फाइल हाईकोर्ट को भेज दी हैं ताकि ट्रायल को शुरू किया जा सके और शिकायतकर्ता को न्याय मिल सके।
यह है मामला
2010 में सीबीआई ने पंजाब विश्वविद्यालय में तैनात एग्जीक्यूटिव इंजीनियर सतीश पदम और सब डिवीजनल ऑफिसर नंदलाल कौशल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 120 बी, 7, 13 (2), 13(1) (डी) के तहत मामला दर्ज किया था। दरअसल, सतीश पदम ने निजी ठेकेदार प्रदीप कुमार से बिल क्लियर करवाने के एवज में 32 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। इसमें नंदलाल कौशल पर बिचौलिए के रुप में साथ देने का आरोप है। ठेकेदार प्रदीप कुमार ने पंजाब विश्वविद्यालय में सिविल कार्य किया था। जिसका उसे 16 लाख रुपए भुगतान किया गया था। रिश्वत मांगे जाने के बाद प्रदीप ने सीबीआई को शिकायत दे दी। जिसके बाद सीबीआई ने ट्रैप लगाकर सतीश पदम को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। दो साल बाद मामले में चार्जशीट दायर की गई थी।