युवाओं को सही और गलत के बारे में समझना होगा
पीयू के समाजशास्त्री प्रो. विनोद चौधरी के अनुसार कई बार मनोरंजन के लिए ऐसे वीडियो बना लेते हैं। गुड फेथ में उसे चंद दोस्तों को भेजते हैं जो ऐसी स्थिति का कारण बनता है। युवाओं को कई मामलों में इस बात की जानकारी ही नहीं होती कि वे क्या कर रहे हैं। कई बार वे फूहड़ वीडियो भी इंटरनेट पर पोस्ट करते हैं। ऐसा खुद और अपने अकाउंट की प्रसिद्धि के लिए भी किया जाता है। इस घटना में इन कारणों की पड़ताल होनी चाहिए क्योंकि अगर ऐसा है तो यह एक मानसिक विकार है। गैजेट्स को लेकर युवाओं को प्रशिक्षित करने की जरूरत है नहीं तो उनकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।
इन बातों पर ध्यान दें अभिभावक
- कामकाजी अभिभावक बच्चों से बात करने के लिए समय निकालें
- बच्चों को असफल होने पर हतोत्साहित न करें, आगे के लिए उनकी हिम्मत बढ़ाएं
- बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखें, समय निकालकर उनके साथ खेलें, बात करें, पुरानी यादों को ताजा करें
- बात-बात पर कड़ा रुख अपनाने के बजाय बच्चे को अपने दिल की बात आपके सामने रखने के लिए प्रोत्साहित करें
- जब बच्चा अपनी बात रखे तो सहनशीलता और धीरज के साथ उसकी बात सुनें ताकि वो आपके समक्ष अपनी भावनाएं रख पाए
- बच्चों की कुछ बातें आपको कड़वी लग सकती हैं लेकिन उत्तेजित या उग्र व्यवहार न करें क्योंकि ऐसा करने पर बच्चा आपसे दूर हो जाएगा
- जब बच्चा आपसे बात कर रहा हो तब आपको उसकी बॉडी लैंग्वेज पर ही ध्यान देना चाहिए ताकि जो बातें वह आपसे बोल नहीं पा रहा आप उसे भी समझ सकें।
- बच्चों के साथ बातचीत के लहजे पर विशेष ध्यान दें