आरोप लगाया कि इस ऑडियो से आंदोलन भड़का और हिंसा हुई। पुलिस ने प्रो. विरेंद्र के खिलाफ देशद्रोह के तहत केस दर्ज किया। तीन साल की जांच के बाद मई-2019 में पुलिस ने अदालत में प्रो. विरेंद्र, जयदीप धनखड़ व मानसिंह दलाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 148, 149, 427, 435, 436, 395,124ए, 120बी, 153ए, 109, 427, प्रिवेंशन ऑफ डेमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट की धारा-3 और नेशनल हाईवे ऑथारिटी एक्ट की धारा 8बी के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।
अब एडीजे कोर्ट में तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय होने थे, लेकिन बचाव पक्ष ने आरोप तय होने से पहले ही डिस्चार्ज के लिए अर्जी दाखिल की, जिसे दोनों पक्षों की बहस के बाद शुक्रवार को अदालत ने स्वीकार कर लिया।
न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। आज यह विश्वास सही साबित हुआ।
- प्रोफेसर विरेंद्र, पूर्व राजनीतिक सलाहकार
मैंने सेना में रहकर देश की सेवा की। आतंकवादी देखकर छुपते थे, लेकिन ऐसे आरोप लगे कि मुझे तीन साल लोगों से छुपना पड़ा। आज अदालत ने आरोपों से मुक्ति दिलाई है।
- कैप्टन मान सिंह दलाल, तत्कालीन प्रवक्ता दलाल खाप
कोर्ट ने पुलिस द्वारा 550 पेज की दाखिल चार्जशीट में दिए सुबूतों को पर्याप्त नहीं माना, जिनके आधार पर आरोप तय कर केस चलाया जाए। ऐसे में अदालत ने तीनों को आरोप मुक्त कर दिया।
- जेके गक्खड़, वरिष्ठ अधिवक्ता बचाव पक्ष