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हरियाणाः जाट आरक्षण आंदोलन हिंसा मामले में प्रोफेसर विरेंद्र समेत तीन लोग आरोप मुक्त

Sat, 07 Dec 2019 09:04 AM IST
खुशबू गोयल विजेंद्र सिंह, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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फाइल फोटो
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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा मामले में तीन साल की जांच और 550 पेज की चार्जशीट के बावजूद रोहतक पुलिस कोई सुबूत नहीं पेश कर सकी। एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत ने सुबूतों के अभाव में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रो. विरेंद्र सिंह, कांग्रेस ग्रामीण इकाई के पूर्व जिला अध्यक्ष जयदीप धनखड़ और दलाल खाप के तत्कालीन प्रवक्ता कैप्टन मान सिंह दलाल को देशद्रोह सहित अन्य धाराओं से आरोपमुक्त कर दिया है। 

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अदालत ने चार्जशीट में दाखिल सुबूतों को केस चलाने लायक भी नहीं माना। सरकारी वकील का कहना है कि मामले में हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की जा सकती है। प्रदेश में फरवरी 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन चला, जिस दौरान सांपला में सबसे पहले नेशनल हाईवे जाम किया गया। बाद में आंदोलन के दौरान रोहतक, सोनीपत, झज्जर, भिवानी, हिसार, जींद और कैथल में हिंसा व आगजनी हुई। 

23 फरवरी को भिवानी निवासी कैप्टन पवन कुमार ने सिविल लाइन थाने में केस दर्ज कराया कि आंदोलन के दौरान 18 फरवरी को पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रो. विरेंद्र और दलाल खाप के प्रवक्ता रहे कैप्टन मान सिंह दलाल के बीच बातचीत की ऑडियो एक निजी न्यूज चैनल के माध्यम से सामने आई है। 

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आरोप लगाया कि इस ऑडियो से आंदोलन भड़का और हिंसा हुई। पुलिस ने प्रो. विरेंद्र के खिलाफ देशद्रोह के तहत केस दर्ज किया। तीन साल की जांच के बाद मई-2019 में पुलिस ने अदालत में प्रो. विरेंद्र, जयदीप धनखड़ व मानसिंह दलाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 148, 149, 427, 435, 436, 395,124ए, 120बी, 153ए, 109, 427, प्रिवेंशन ऑफ डेमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट की धारा-3 और नेशनल हाईवे ऑथारिटी एक्ट की धारा 8बी के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। 

अब एडीजे कोर्ट में तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय होने थे, लेकिन बचाव पक्ष ने आरोप तय होने से पहले ही डिस्चार्ज के लिए अर्जी दाखिल की, जिसे दोनों पक्षों की बहस के बाद शुक्रवार को अदालत ने स्वीकार कर लिया।  

न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। आज यह विश्वास सही साबित हुआ।
- प्रोफेसर विरेंद्र, पूर्व राजनीतिक सलाहकार


मैंने सेना में रहकर देश की सेवा की। आतंकवादी देखकर छुपते थे, लेकिन ऐसे आरोप लगे कि मुझे तीन साल लोगों से छुपना पड़ा। आज अदालत ने आरोपों से मुक्ति दिलाई है।
- कैप्टन मान सिंह दलाल, तत्कालीन प्रवक्ता दलाल खाप

कोर्ट ने पुलिस द्वारा 550 पेज की दाखिल चार्जशीट में दिए सुबूतों को पर्याप्त नहीं माना, जिनके आधार पर आरोप तय कर केस चलाया जाए। ऐसे में अदालत ने तीनों को आरोप मुक्त कर दिया।
- जेके गक्खड़, वरिष्ठ अधिवक्ता बचाव पक्ष
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