चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के वीसी प्रो. राजकुमार ने डीएसडब्ल्यू प्रो. एसके तोमर का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया है। वह 31 मई 2022 तक कार्य करेंगे। महिला डीएसडब्ल्यू के पद पर प्रो. मीना शर्मा को तैनात किया गया है। वह भी एक साल तक इस पद पर कार्य करेंगी। एडीएसडब्ल्यू प्रो. अशोक कुमार को बनाया गया है।
डीएसडब्ल्यू प्रो. एसके तोमर का एक साल का कार्य संतोषजनक रहा। बताया जाता है कि उन्होंने अधिकांश निर्णय खुद लिए। किसी के दबाव में आकर कार्य नहीं किए। यहां तक कि भाजपा व संघ के भी कुछ लोगों के कार्यों को उन्होंने नहीं किया। वह नियमों के अनुसार कार्य करने की बात करते हैं। वह खुद पीयू के वीसी पद की दौड़ में थे। इसके अलावा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के वीसी पद के लिए भी वह शॉर्टलिस्ट हुए थे। ऐसे में पीयू के उच्चाधिकारी उनके नाम को काटना नहीं चाहते थे, इसलिए ही उनका कार्यकाल बढ़ाया गया।
सूत्रों का कहना है कि पिछले साल सिंडिकेट ने डीएसडब्ल्यू उसी को बनाने के लिए कहा था, जो शिक्षक वार्डन रहा हो। भाजपा खेमे के पास प्रो. तोमर का ही नाम सामने था। बताया जाता है कि भाजपा खेमे के पास इस साल नया डीएसडब्ल्यू बनाने के लिए विकल्प नहीं था।
प्रो. मीना शर्मा का शिक्षण क्षेत्र में 30 साल का अनुभव
यूबीएस विभाग में कार्यरत प्रो. मीना शर्मा को शिक्षण का 30 साल से अधिक का अनुभव है। वह शिक्षण व शोध से लंबे समय से जुड़ी हैं। विभिन्न राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में उनके शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं। 35 से अधिक सम्मेलनों में वह हिस्सा ले चुकी हैं। वर्तमान में सेंट्रल प्लेसमेंट सेल की मानद निदेशक भी हैं। वहीं दूसरी ओर एक खेमे ने सवाल उठाए हैं कि महिला डीएसडब्ल्यू भी उसी को लगाया जाना चाहिए था, जो वार्डन रही हों। प्रो. मीना शर्मा का इस पद पर अनुभव नहीं रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों के साथ संवाद में दिक्कतें होंगी। उन्होंने कहा है कि यह पद देने में नियमों की अनदेखी की गई है।
आखिरकार एडीएसडब्ल्यू बदले गए
एडीएसडब्ल्यू के पद पर तैनात रहे प्रो. रंजन विदेश में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। दो साल से वह इस पद पर थे। उनका कार्यभार भी किसी अन्य को नहीं दिया गया। इसी को लेकर अमर उजाला ने मुद्दा बनाया। यह बताने की कोशिश की कि इस पद के बिना कितने कार्य प्रभावित होंगे। इसी को देखते हुए प्रो. अशोक कुमार को पीयू ने एडीएसडब्ल्यू बनाया। कुछ लोगों का कहना है कि प्रो. अशोक का नाम इस पद के लिए पिछले साल भी आया था, लेकिन सिंडिकेट ने मंजूरी नहीं दी थी।