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Chandigarh News: 12 साल से पदोन्नति की बाट जोह रहे प्राथमिक अध्यापक

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अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। हरियाणा शिक्षा विभाग में प्राथमिक शिक्षक कई सालों से पदोन्नति की बाट जोह रहे हैं। शिक्षा विभाग की एक ही छत के नीचे स्थित शाखाओं के बीच आपसी सामंजस्य न होने के कारण जहां एक और पिछले 12 सालों से प्राथमिक शिक्षक अपने मास्टर पद पर प्रमोशन के योग्य होते हुए भी अपने प्रमोशन को तरस रहे हैं। इसके चलते प्रदेश के मिडिल व हाई स्कूलों के हजारों बच्चों को बिना अपने विषय का मास्टर मिले ही पढ़ना पड़ रहा है।
यह आरोप राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रधान तरूण सुहाग, संयोजक सुनील बास, कोषाध्यक्ष सुनील यादव ने जारी संयुक्त बयान में लगाए। उन्होंने जारी बयान में कहा कि यहां तक की शिक्षकों की कमी का मामला विधानसभा तक में उठ चुके हैं और विभागीय अधिकारियों की कार्य प्रणाली के चलते शिक्षा मंत्री महोदय तक को गलत आंकड़े विधानसभा में रखने का मामला भी चर्चा में रहा है। उन्होंने बताया कि 2012 के रूल्स के बाद से ही एक दो विषय को छोड़कर किसी भी विषय की प्रमोशन नहीं किए गए। इसके चलते प्रमोशन के योग्य प्राथमिक शिक्षक या तो बिना प्रमोशन लिए ही रिटायर हो रहे हैं या अपने हक के लिए सालों से कोर्ट में धक्के खा रहे हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि पदोन्नति में विभाग ने सीनियर जेबीटी शिक्षकों को छोड़कर उनसे जूनियर शिक्षकों के प्रमोशन कर दिए, जिसके चलते सीनियर टीचर कोर्ट में में गए हुए हैं और विभागीय अधिकारी चुपचाप बैठे तमाशा देख रहे हैं।
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विभाग केस मांगने तक सीमित
2012 के सर्विस रूल से पहले जहां जेबीटी टीचरों से पदोन्नति दो तरह से होती थी एक सीएंडवी टीचर जिसमें संस्कृत, हिंदी पीटीआई और ड्राइंग टीचर आते थे। जिनके कुल पदों का कुल पदों का 25 प्रतिशत प्रमोशन योग्य जेबीटी शिक्षकों से होता था, वहीं टीजीटी मास्टर पद पर पदोन्नति के लिए कुल पदों का कोटा 50 प्रतिशत होता था। परंतु 2012 के सर्विस रूल्स के बाद सी एंड वी कैडर को खत्म करते हुए टीजीटी केडर बना दिया गया और सभी विषयों की प्रमोशन कोटा 33 प्रतिशत कर दिया गया है।
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लेकिन सारा रिकॉर्ड पदों की संख्या सब कुछ होते हुए भी विभाग विषय वार प्रमोशन नहीं कर पा रहा। संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि खुद विभाग अब तक भी केवल दो प्रमोशन के केस मांगने तक ही सीमित है।

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