हरियाणा में पिछले कुछ समय से ई-सिगरेट का प्रचलन बढ़ रहा है। इसी को लेकर सरकार से अब इस पर पूर्णतया पाबंदी की मांग की गई है। इसी लेकर समाज सेवी संस्थान सिटिजंस अवेरनेस ग्रुप (सीएजी) और कंज्यूमर वायस ने हरियाणा के मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री व स्वास्थ्य सचिव को पत्र भेजकर उनसे तमिलनाडु की तर्ज पर हरियाणा में भी ई-सिगरेट पर पाबंदी लगाने की मांग की है।
सीएजी के चेयरमैन सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार सभी यूटी और प्रदेशों में ई- सिगरेट की बिक्री पर पाबंदी लगाने को कहा गया है। इस एडवाइजरी पर अमल करते हुए 3 सितंबर को तमिलनाडु ने ई-सिगरेट पर बैन लगा दिया, जिससे कि ऐसा करने वाला वह नौवां राज्य बन गया है।
उन्होंने पत्र में बताया कि ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में 23 फीसदी व्यस्क किसी न किसी रूप में तंबाकू का उपयोग करते हैं, जिसमें से 32 फीसदी और 6.3 फीसदी महिलाएं शामिल हैं। ई-सिगरेट का उपयोग निकोटिन की लत के रूप में युवाओं को लुभाने के लिए किया जाता है, जिससे धीरे धीरे तंबाकू सिगरेट की आदत बन जाती है, जिसे तत्काल से प्रतिबंधित करने की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि ई सिगरेट के रूप में इलेक्ट्रानिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम के दुष्प्रभावों के मद्देनजर पंजाब, बिहार, महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, मिजोरम, जम्मू और कश्मीर और उत्तर प्रदेश में पाबंदी लगाई जा चुकी है, जिसे अब हरियाणा को भी अमल करना चाहिए।