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पेक को सीएफटीआई श्रेणी में शामिल करने के लिए प्रेजेंटेशन, एडवाइजर बोले- पहले कमियों को पहचानें

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पेक में स्थापना दिवस मनाने पहुंचे एडवाइजर धर्मपाल को सम्मानित करते हुए। - फोटो : CHANDIGARH
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चंडीगढ़। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज बुधवार को 102वें वर्ष में प्रवेश कर गया। कार्यक्रम में मुख्यातिथि यूटी एडवाइजर और पेक एलुमनी धर्मपाल रहे। पेक निदेशक डॉ. बलदेव सेतिया की ओर से संस्थान को सेंट्रली फंडेड टेक्निकल इंस्टीट्यूट (सीएफटीआई) बनाने के प्रस्ताव को लेकर प्रस्तुति दी गई। इस पर एडवाइजर धर्मपाल ने कहा कि पहले हमें कमियों की पहचान करनी चाहिए कि श्रेष्ठ होने के बावजूद सीफटीआई की श्रेणी में केंद्र की ओर से शामिल क्यों नहीं किया गया।
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एडवाइजर धर्मपाल और टेक्निकल एजुकेशन के निदेशक अमनदीप सिंह भट्टी ने कहा कि कमियों पर विश्लेषण और अभी तक सीफटीआई में शामिल नहीं करने के कारणों के साथ रिपोर्ट सौंपी जाए। इसके बाद प्रशासन की ओर से पेक को सीफटीआई की श्रेणी में शामिल करने को लेकर एमएचआरडी के साथ बैठक रखी जाएगी। पेक निदेशक डॉ. बलदेव सेतिया ने बताया कि आईआईटी दिल्ली को पहला निदेशक और फाउंडर सदस्य देने वाला पेक था। 1960 में पेक को आईआईटी में बदलने को लेकर पंजाब सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था तब से यह प्रक्रिया जारी है।
इतनी बार बना प्रस्ताव लेकिन नहीं हुए कारगार
वर्ष 1960 : पंजाब सरकार को आईआईटी में तब्दील के लिए भेजा प्रस्ताव। भारत सरकार ने पंजाब सरकार इसे फाइनेंस करेगी, इस शर्त पर दी अनुमति।
वर्ष 1964 : तत्कालीन पंजाब मुख्यमंत्री ने कैबिनेट मंत्रियों के साथ बैठक में संस्थान को भारत सरकार के निर्देशानुसार फाइनेंस करने पर जताई सहमति। हालांकि बाद में यह प्रस्ताव रद्द हो गया।
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वर्ष 1966 : तत्कालीन मुख्यमंत्री रामकृष्ण के समय फिर से पेक को आईआईटी बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। बजट भाषण में इसे अनुमति दी गई लेकिन पंजाब के एक नवंबर 1966 के रि-ऑर्गेनाइजेशन के बाद फिर से यह रद्द हो गया।
वर्ष 1996 : गृह सचिव यूटी अनुराधा गुप्ता के निर्देशों पर तत्कालीन पेक प्राचार्य ने इसे एनआईटी में परिवर्तित करने का प्रस्ताव यूटी प्रशासन के पास भेजा।
वर्ष 1997 : पेक के 50 वर्ष पूरे होने के जश्न में तत्कालीन उप-राष्ट्रपति ने संस्थान का दौरा किया और इसके इतिहास को देखते हुए इसे राष्ट्र स्तरीय संस्थान में परिवर्तित करने पर बल दिया।
वर्ष 2001 : अंतरराष्ट्रीय आई बूम के दौर में भारत सरकार ने देश के टेक्निकल संस्थानों को नेशनल इंस्टीट्यूट में परिवर्तित करने की बात कही। इन टॉप संस्थानों में पेक भी शामिल था। इसे लेकर चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों के साथ एमएचआरडी की बैठक भी हुई।
वर्ष 2003 : पेक को डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला।
वर्ष 2009 : पेक बीओजी की ओर से संस्थान का नाम बदलकर पेक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी रजिस्टर्ड करवाया गया।
वर्ष 2013 : भारत सरकार के अधिकारियों के साथ पेक को नेशनल दर्जे के संस्थान जैसे एनआईटी में तब्दील करने पर बैठक हुई। चंडीगढ़ वित्त सचिव की ओर से एमएचआरडी को वर्ष 2014 में प्रस्ताव भी भेजा गया।
वर्ष 2017 : पेक को एनआईटी में तब्दील करने को लेकर एक बार फिर एमएचआरडी को पत्र भेजा गया। इस दौरान एमएचआरडी ने कहा कि नए आईआईटी और किसी भी पुराने संस्थान को तब्दील नहीं किया जाएगा। इस पर संस्थान ने एनआईटी के स्तर पर संस्थान को सीएफटीआई की श्रेणी में शामिल करने की मांग रखी।
वर्ष 2020 : पेक को सीएफटीआई में तब्दील करने को लेकर को यूटी प्रशासन के समक्ष प्रस्ताव रखा गया।
पेक को ग्रांट में झेलना पड़ रहा 100 से 130 करोड़ का नुकसान
पेक निदेशक डॉ. बलदेव सेतिया ने बताया कि एनआईटी नहीं होने और सीएफटीआई की श्रेणी में शामिल नहीं होने के कारण पेक को ग्रांट में 100 से 130 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ रहा है। एनआईटी और सीएफटीआई की श्रेणी में शामिल संस्थानों को 100 से 200 करोड़ के मध्य ग्रांट मिलती है। वहीं पेक की ग्रांट 70 करोड़ है। फेकल्टी स्टूडेंट रेशो एनआईटी और सीएफटीआई का 1 अनुपात 15 है। वहीं पेक में 1 अनुपात 25 है। इस कारण गुणवत्ता प्रभावित होती है।
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