चंडीगढ़। एग्रीगेटर कंपनियों के नियमों की अवहेलना पर प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ओला, ऊबर, रैपिडो और इन-ड्राइव को नोटिस देने और उनके ऑफिसों की विजिट के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। अब वित्त एवं परिवहन सचिव दिप्रवा लाकड़ा ने इन कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सचिव ने फाइल एलआर (लीगल रिप्रेजेंटेटिव) को भेज दी है। अधिकारियों के अनुसार एलआर से एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी गई है। अगर एलआर कानूनी मंजूरी देता है तो दिसंबर में इन कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं। ट्राइसिटी के कैब और ऑटो ड्राइवर लगातार शिकायत लेकर प्रशासन के पास पहुंचे कि एग्रीगेटर कंपनियां नई चंडीगढ़ मोटर व्हीकल एग्रीगेटर पॉलिसी-2025 और 7 जुलाई 2025 के किराया नियमों का पालन नहीं कर रही हैं।
न्यूनतम किराया लागू करने के बजाय कंपनियों ने सब्सक्रिप्शन मॉडल लागू कर दिया जिससे ड्राइवरों का शोषण बढ़ गया।