चीन और पाकिस्तान के साथ चल रहे मौजूदा तनावग्रस्त माहौल को लेकर सेना और वायुसेना पूरी तरह मुस्तैद है और सरहदों की निगहबानी में जुटी हुई हैं। इसी के मद्देनजर इन बॉर्डर इलाकों में लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर लगातार गश्त भी कर रहे हैं। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर मिग के साथ-साथ राफेल, अपाचे और चिनूक जैसे हेलीकॉप्टर तैनात हैं। एलएसी के साथ-साथ ये विमान और हेलीकॉप्टर लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) की सुरक्षा के लिए भी तैयार हैं।
ऐसी स्थिति में अब भारतीय वायुसेना इन तैयारियों में जुटी है कि बॉर्डर इलाकों में सक्रिय लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और हवाई पट्टियों के बीच दूरी कम रहे। युद्ध जैसी स्थिति में इन विमानों और हेलीकॉप्टरों को ईंधन (एविएशन फ्यूल) के लिए ज्यादा दूर एयरबेस तक न जाना पड़े। रक्षा विशेषज्ञ भी इस पहलू को सबसे अहम मानते हैं।
सूत्र बताते हैं कि इसी के चलते भारतीय सेना इन इलाकों में अपने ‘एडवांस लैंडिंग ग्राउंड’ को मजबूत बनाएगी। यह लैंडिंग ग्राउंड बॉर्डर क्षेत्रों में एक तरह की अस्थायी हवाई पट्टियां होती हैं, जो युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के लिए बड़ी मददगार साबित होती हैं।
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एयरफोर्स के एक आला अफसर ने बताया कि इस स्थिति को यदि देखें तो भारत की स्थिति चीन से ज्यादा बेहतर है। हमारी लगातार कोशिशें रहती हैं कि इन क्षेत्रों में हमारे लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर युद्ध जैसी स्थिति में ईंधन के लिए ज्यादा दूर बने एयरबेस तक न जाएं।
युद्ध के दौरान लड़ाकू विमानों को ईंधन के लिए दूर एयरबेस तक आने-जाने में लगने वाला समय युद्ध रणनीति के दौरान बड़ा मायने रखता है, क्योंकि लड़ाकू विमान जब युद्ध में किसी ऑपरेशन का हिस्सा बनते हैं तो उन्हें अपने पास इतना ईंधन जरूर बचाकर रखना पड़ता है, जो उन्हें वापस एयरबेस तक लाने में मददगार बनता है। इस स्थिति में यदि एयरबेस बॉर्डर एरिया से दूर हों तो लड़ाकू विमानों के युद्ध अभियान प्रभावित होते हैं। इसलिए भारतीय वायुसेना इसी समय सीमा को कम से कम करने की तैयारियों में जुटी हुई है।
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पूर्व सेना प्रमुख बीएस धनोआ ने मौजूदा परिस्थितियों के मद्देनजर वायुसेना में बड़े हथियारों की भूमिका की वकालत करते हुए बताया कि एयरबेस से लड़ाकू विमानों की दूरी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। उन्होंने लड़ाकू विमानों के साथ तय की गई दूरी और हवाई पट्टियों के दरमियान दूरी की तुलना करते हुए कहा कि यह दूरी जितनी कम होगी, वायुसेना विभिन्न युद्ध अभियानों में दुश्मन पर ज्यादा भारी पड़ेगी। उन्होंने एयरफोर्स में विभिन्न स्क्वॉड्रन की ताकत और एयरबेस का सामर्थ्य बढ़ाने पर भी जोर दिया।