चंडीगढ़। यूटी प्रशासन अब चंडीगढ़ को निर्यात हब बनाने बनाने की तैयारी में है। इसके लिए चंडीगढ़ निर्यात प्रोत्साहन योजना (एक्सपोर्ट प्रोमोशन प्लान) तैयार की गई है। इसका मसौदा भी प्रशासन ने जारी कर दिया है, जिसमें शहर को निर्यात हब बनाने के लिए कई सुझाव, दिशानिर्देश व रुकावटों का जिक्र किया गया है।
चंडीगढ़ की आर्थिक, औद्योगिक प्रोफाइल व सभी मुद्दों और समस्याओं को ध्यान में रखते हुए ही निर्यात योजना को लागू करने के लिए सुझाव दिए गए हैं। कहा गया है कि चंडीगढ़ के बाहरी क्षेत्र में एक ड्राई पोर्ट (बंदरगाह) स्थापित करना चाहिए, जहां से पंजाब-हरियाणा, हिमाचल आदि राज्यों के सामान को विदेश भेजा जाएगा। साथ ही मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब स्थापित करने की भी संभावनाएं तलाश करने की बात कही गई है। कहा गया है कि शहर में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बिना रुकावट विद्युत आपूर्ति बहुत जरूरी है। ऐसे में विद्युत उत्पादन को भी बढ़ाए जाने की जरूरत है। कम वोल्टेज, मेंटेनेंस व शीघ्र मरम्मत का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। निर्यातकों को स्मार्ट ट्रेड के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम व कार्यशालाओं का आयोजन कर, उन्हें जागरूक करना होगा। इनका आयोजन विदेशी व्यापार और प्रबंधन संस्थानों के सहयोग से किया जा सकता है, जिससे उन्हें निर्यात बाजार के अवसर मिलेंगे।
अन्य देशों के साथ जुड़ेगा हवाईअड्डा, तभी बढ़ेगा निर्यात
निर्यात प्रोत्साहन योजना में इस बात पर जोर दिया गया है कि अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे को अन्य देशों से जोड़ना बेहद जरूरी है। अभी चंडीगढ़ से सिर्फ दुबई के लिए ही सीधी फ्लाइट है। शहर में निर्यात को बढ़ावा देना है तो इस सेवा का विस्तार बेहद जरूरी है। एग्रो निर्यातकों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमियों व अन्य निर्यातकों के फायदे के लिए एक ट्रेड गाइड बनाई जानी चाहिए ताकि जरूरी जानकारी उनको आसानी से मिल सके। विश्व स्तर पर बेहतर प्रतिस्पर्धा के लिए निर्यातकों को मार्केट इंटेलिजेंस आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए, क्योंकि वह अपने आप ये जानकारी प्राप्त करने में असमर्थ रहते हैं। उनके पास संसाधनों की कमी के चलते ऐसा होता है। सुझाव दिया गया है कि प्रशासन ज्यादा से ज्यादा निर्यातकों को स्टेट एक्सपोर्ट काउंसिल के सदस्य बनाने के लिए प्रोत्साहित करे और इसके लिए विशेष ड्राइव भी चलाए। इसके तहत इनवेस्टर समिट का आयोजन किया जाए और निजी संस्थानों के साथ एमओयू भी साइन करें। निर्यातकों की समस्याओं को दूर करने के लिए एक मोबाइल एप्लीकेशन व वेबसाइट भी बनाने का सुझाव दिया गया है।