बीच चौराहे पर ही दर्द से तड़प रही गर्भवती महिला की डिलीवरी करवा दी गई। मामला पंजाब के जालंघर का है। गरीबों के लिए शुरू की गई 108 एंबुलेंस सेवा को कई बार कॉल किया, लेकिन फोन न लगने पर दर्द से तड़प रही गर्भवती महिला को उसका पति रिक्शा पर ही लेकर अस्पताल की ओर निकल गया।
रास्ते में दर्द असहनीय हुआ तो वहां से गुजर रही महिलाओं ने पर्दा कर बीच चौराहे में ही उसकी डिलीवरी करवा दी, लेकिन बच्चे को नहीं बचाया जा सका।
एंबुलेंस समय पर आती तो बच जाती बच्चे की जान
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- फोटो : अमर उजाला
गुरुनानक पुरा के रहने वाले कनु ने रोते हुए कहा कि उसकी पत्नी के गर्भ ठहरा हुआ था। पत्नी को मंगलवार को दर्द शुरू हुआ तो कई बार 108 एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन कॉल नहीं लगी। फोन कट्ट जाता या कंप्यूटर की फैक्स टोन की आवाज सुनाकर बंद हो जाता। पत्नी मोना की हालत उससे नहीं देखी गई तो वह उसे रिक्शा पर बैठाकर अस्पताल की तरफ निकल पड़ा।
कंपनी बाग चौक के पास मोना का दर्द बढ़ गया। वहां से गुजर रही कुछ महिलाओं ने मोना की हालत को देखकर उसकी डिलीवरी करनी चाही। राहगीरों ने फोन कर किसी तरह से सिविल अस्पताल से 108 एंबुलेंस को बुलाया। एंबुलेंस महिला मोना और बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंची, लेकिन तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी
108 नंबर ज्यादा व्यस्त नहीं रहता : दुग्गल
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मोना के पति कनु ने कहा कि शादी के बाद उनका यह पहला बच्चा था, लेकिन अगर एंबुलेंस समय पर पहुंच जाती तो उसके बच्चे की जान बच सकती थी।
सिविल अस्पताल के सिविल सर्जन राजीव दुग्गल का कहना है कि इस तरह नहीं हो सकता है कि 108 फोन नंबर न लगे। इस नंबर को मिलाने पर किसी न किसी लाइन पर तो बात हो ही जाती है। अगर कोई सिस्टम में खराबी हो तो वो कहा नहीं जा सकता। मगर ज्यादातर यह फ्री काल है ओर व्यस्त भी कम ही रहती है।