कोर्ट ने केंद्र व हरियाणा सरकार से जवाब तलब किया
-इंटरनेट पर वीडियो अपलोड कर युवाओं को गैंगस्टर बनने के लिए प्रेरित करने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। परवीन उर्फ दादा की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए केंद्र और हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है। याचिका दाखिल करते हुए प्रवीण ने हाईकोर्ट को बताया था कि उसके खिलाफ विभिन्न मामलों में एफआईआर दर्ज है और 2023 में उसे गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद एनएसए के तहत उसे हिरासत में रखा गया है। याची ने बताया कि उस पर आरोप है कि वह लोगों को आतंकित करता है और सोशल मीडिया पर ऐसी वीडियो डालता है जिससे युवा गैंगस्टर बनने को प्रेरित हों। याचिकाकर्ता ने कहा कि उसके पिछले आचरण और उसे हिरासत में लेने की एनएसए के तहत अनिवार्य आवश्यकता के बीच कोई जीवंत और निकट संबंध नहीं है। अप्रैल में याची को रोहतक ट्रायल कोर्ट ने जमानत दी थी लेकिन वह जमानत राशि नहीं दे सका। जिला मजिस्ट्रेट का यह आदेश कि याचिकाकर्ता अपने पिछले आचरण के आधार पर रिहा होने पर जघन्य अपराधों में लिप्त होगा, बिना किसी ठोस सबूत के मात्र संदेह के अलावा कुछ नहीं है। इन कारणों को आधार बनाते हुए याची ने एनएसए की धारा 3 के तहत 2024 में पारित निरोध हिरासत आदेश को निरस्त करने की मांग की है। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस अनिल खेत्रपाल की खंडपीठ ने कहा केंद्र व और हरियाणा राज्य अपने जवाब दाखिल करें और जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय संबंधित प्रासंगिक रिकॉर्ड पेश करें जिसके आधार पर निरोधक आदेश जारी किया गया है। आरोप के अनुसार याचिकाकर्ता प्रवीन उर्फ दादा रोहतक के आजाद गैंग का हिस्सा है और यूट्यूब पर वीडियो डालकर युवाओं को गैंगस्टर बनने के लिए प्रेरित करता है। उसके खिलाफ रोहतक समेत कई जगहों पर 20 से अधिक मामले दर्ज हैं।