पंजाब विधानसभा चुनाव 2017 में कांग्रेस को यूं ही जीत नहीं मिली। इसके पीछे एक शख्स है, जिसने ऐसा खेला कि सभी चारों खाने चित्त होकर मुंह के बल गिरे। हम बात कर रहे हैं चुनाव के स्पेशलिस्ट प्रशांत किशोर की, जिन्होंने पहले मोदी की लहर दौड़ाई थी और अब पंजाब में कांग्रेस की तूफान ऐसा उड़ाया कि सभी देखते रह गए।
पंजाब चुनाव के बाद प्रशांत किशोर ने एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें उन्होंने साफ कह दिया था कि पंजाब में कांग्रेस 68 से 70 सीटों पर कब्ज़ा करेगी और सरकार बनाएगी। वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी उम्मीद थी कि पार्टी 60 से ऊपर सीट जीतेगी।
हालांकि दोबारा हुई वोटिंग के बाद बदले समीकरणों ने इनकी चिंता बढ़ा दी थी, लेकिन 11 मार्च को यह चिंता दूर हो गई। सुना जा रहा था कि मालवा क्षेत्र में आम आदमी पार्टी की स्थिति काफी मजबूत है। मालवा में 117 सदस्यीय विधानसभा की 69 सीटें हैं, लेकिन यह कहावत भी गलत साबित हो गई।
पंजाब में कुछ अलग नजर नहीं आया इस बार
प्रशांत किशोर की सलाह पर चलेगी कांग्रेस
वहीं प्रशांत किशोर के मुताबिक, वोट प्रतिशत के हिसाब से बात करें तो पंजाब में इस बार भी कुछ अलग नजर नहीं आया। साल 2007 के विधानसभा चुनावों में 76 फीसदी वोट पड़े थे, जबकि साल 2012 और 2017 के विधानसभा का वोट प्रतिशत भी 79 प्रतिशत ही रहा है।
2009 के लोकसभा चुनावों में यहां से 70 फीसदी वोट लोगों ने डाले थे, वहीं 2014 में भी वोट प्रतिशत मात्र 1 फीसदी बढ़कर 71 फीसदी हुआ। 2012 में जहां 78.50 प्रतिशत पुरुषों ने वोट डाले थे, वहीं इस बार यह 78.09 प्रतिशत रहा।
दूसरी ओर 2012 में महिलाओं ने 79.20 प्रतिशत वोटिंग की थी, जबकि इस बार 79.10 प्रतिशत महिलाओं ने वोट डाले। बता दें कि प्रशांत किशोर ने नंवबर 2016 में कांग्रेस को पंजाब में जीत दिलाने का बीड़ा उठाया था, जिसमें वे सफल भी रहे।