चंडीगढ़। पूर्व मेयर व वरिष्ठ नेता प्रदीप छाबड़ा मंगलवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। सेक्टर-25 स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार हुआ। उनके अंतिम दर्शन को सैकड़ों लोग पहुंचे। परिवार के सदस्यों ने उन्हें मुखाग्नि दी। श्रद्धांजलि देने के लिए भाजपा, कांग्रेस समेत आम आदमी पार्टी और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता पहुंचे।
प्रदीप छाबड़ा को लिवर सिरोसिस की बीमारी थी। उनका पिछले काफी समय से पीजीआई में इलाज चल रहा था। उनके भाई दिल्ली में रहते हैं, इसलिए कुछ दिन उन्होंने वहां भी इलाज कराया है। वह 4-5 दिन पहले ही दिल्ली से इलाज कराकर लौटे थे। मंगलवार को रुटीन चेकअप के लिए उन्हें पीजीआई जाना था लेकिन सोमवार देर रात उनकी अचानक तबीयत खराब हो गई। सुबह 10 बजे के करीब उन्हें बेहोशी की हालत में पीजीआई ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया गया कि प्रदीप छाबड़ा की रास्ते में ही मृत्यु हो गई थी। बता दें कि छाबड़ा चंडीगढ़ के पूर्व मेयर के साथ-साथ कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वह पंजाब लार्ज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बोर्ड के मौजूदा अध्यक्ष रहे हैं। वह 1986 से राजनीति में सक्रिय थे। प्रदीप छाबड़ा सेक्टर-22 और सेक्टर-16 के पार्षद भी रहे हैं। उन्होंने अपना राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू किया था और अभी वर्तमान में वह आम आदमी पार्टी में थे। जब छाबड़ा आप में आए तो पहली बार पार्टी ने निगम चुनाव लड़ा था और 14 सीटें जीती थीं।
प्रदीप छाबड़ा के देहांत पर सदन में रखा गया मौन : नगर निगम के सदन की बैठक के शुरू होने के आधा घंटा पहले वरिष्ठ नेता प्रदीप छाबड़ा के देहांत की खबर आई। बैठक के शुरू होते ही मेयर कुलदीप कुमार ने सभी से दो मिनट का मौन रखने का आग्रह किया, जिसके बाद सभी पार्षद और अधिकारियों ने दो मिनट का मौन रखा। भाजपा की तरफ से प्रदीप छाबड़ा के सम्मान में बैठक को तुरंत रद्द करने की मांग भी की गई। छाबड़ा के लिए 2 मिनट का मौन रखने के बाद भाजपा के पार्षद कंवरजीत राणा खड़े हुए और उन्होंने कहा कि प्रदीप छाबड़ा शहर के पूर्व मेयर और काफी वरिष्ठ नेता हैं, इसलिए उनके सम्मान में सदन की बैठक को रद्द किया जाना चाहिए। इस पर अन्य पार्षदों ने भी अलग-अलग राय दिए और कहा कि प्रदीप छाबड़ा हमेशा काम को बहुत गंभीरता से लेते थे। सभी पार्षदों की राय के बाद बैठक को जारी रखने का फैसला लिया गया।