पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन (पीपीएससी) के पूर्व चेयरमैन रविंद्रपाल सिंह उर्फ रवि सिद्धू को विजिलेंस की अदालत ने कैद और जुर्माने की सजा सुनाई। आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में सिद्धू को सात साल की सजा सुनाई गई है। साथ ही उन पर 75 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना न चुकाने की स्थिति में उन्हें एक साल और जेल में बिताना पड़ेगा। यह आदेश अतिरिक्त जिला सेशन जज मोनिका गोयल ने दिया। अदालत ने उन्हें प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 13 (1) और 13 (2) के तहत दोषी ठहराया गया है।
वहीं आईपीसी की धारा 467 जालसाजी व 120 बी आपराधिक षड्यंत्र रचने में उन्हें बरी कर दिया गया है। अदालत ने रवि सिद्धू को 10 जनवरी को दोषी ठहराया था। इस मामले में परमजीत सिंह, गुरदीप सिंह मनोचा, उसकी पत्नी सुरिंदर कौर, प्रेम सागर और रनधीर सिंह धीरा को बरी कर दिया था। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2002 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में रवि सिद्धू व उसके साथियों खिलाफ 25 मार्च 2002 को आईपीसी की धारा 467, 468, 471, 120बी तथा प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धाराओं के तहत मोहाली में केस दर्ज किया था।
नौकरी घोटाले में भी हो चुकी है सात साल की सजा
याद दिला दें कि रवि सिद्धू पर नौकरी घोटाले में साल 2002 में केस दर्ज हुआ था। कई साल केस पटियाला अदालत में चला। 2015 में अदालत ने उन्हें व उनके कुछ साथियों को मामले में दोषी ठहराया था। साथ ही उन्हें सात साल जेल की सजा सुनाई थी। उन पर एक करोड़ रुपये जुुर्माना लगाया गया था। जुर्माना न चुकाने की स्थिति में उन्हें एक साल जेल में बिताने के आदेश दिए थे। इस समय वे जेल में ही सजा काट रहे हैं।
लॉकर से मिले थे आठ करोड़
2002 में ‘कैश फॉर जॉब’ घोटाले में रवि सिद्धू को 5 लाख रिश्वत लेते हुए विजिलेंस ने गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान सिद्धू के अलग-अलग नाम से कई लॉकरों का पता चला। उनमें से करीब आठ करोड़ 30 लाख रुपये मिले थे।
वकील को कहा थैंक्स, मीडिया से नहीं की बात
जैसे ही रवि सिद्धू को अदालत ने सजा सुनाई, उनका चेहरा उतर गया था। हालांकि उन्होंने अपने वकील को थैंक्स किया। इसके बाद जज ने उन्हें पीछे जाने को कहा तो पुलिस वाले उन्हें पीछे ले गए। इसके बाद कुछ मीडिया कर्मियों ने उनसे बातचीत करने की कोशिश की। उन्होंने मीडिया से बातचीत करने से साफ मना कर दिया। देर शाम तक मीडिया वालों का जमावड़ा अदालत में लगा रहा।
दो मिनट में सुनाया फैसला
जानकारी के मुताबिक पुलिस वाले कड़ी सुरक्षा में रवि सिद्धू को दो बजे लंच के बाद अदालत में लेकर पहुंचे। हालांकि जज ने इस दौरान कहा कि वह सवा चार बजे फैसला सुनाएगी। माना जा रहा था कि अदालत में जज काफी लंबा फैसला सुनाएंगी। लेकिन जज सिर्फ दो मिनट में फैसला सुनाकर चली गईं। करीब साढ़े पांच बजे आरोपी को पुलिस अदालत से बाहर लेकर गई।
जैकेट की टोपी व कागज से छुपाया चेहरा
जब दोषी को जेल भेजा जाने लगा तो पहले अपनी नीले रंग की जैकेट में लगी टोपी लगा ली। इसके बाद मीडिया के कैमरों की तरफ कागज कर दिए ताकि उन्हें कैमरे में कैद न कर पाए। वहीं, पुलिस वालों ने भी पूरा घेरा बनाया हुआ था। इसके बाद दोषी को वैन तक पहुंचाया गया। इससे पहले पटियाला में जब उन्हें सजा सुनाई गई थी, उस समय भी वे कैमरों से ऐसे ही बच रहे थे।