रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के आदेश को बिल्डर ने दी थी चुनौती, नहीं हो सकी थी सुनवाई
अपीलेट अथॉरिटी में सदस्यों की नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
चंडीगढ़। रियल एस्टेट अपीलेट अथॉरिटी में सदस्यों के रिक्त पदों की जानकारी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए इन पदों को लेकर हरियाणा सरकार को नोटिस जारी करते हुए इनपर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। खास बात यह है कि रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण का नेतृत्व वर्तमान में सेवानिवृत्त हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस राजन गुप्ता कर रहे हैं, लेकिन न्यायाधिकरण में कोई अन्य सदस्य नहीं है। न्यायाधिकरण को रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) के निर्णय के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई करने का अधिकार है। अध्यक्ष के अलावा सदस्यों के दो पद कई महीनों से रिक्त हैं। सदस्यों के न होने से न्यायाधिकरण निष्क्रिय हो गया है।
ब्रह्मा सिटी प्राइवेट लिमिटेड ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया था कि एक ग्राहक की शिकायत पर रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने उसके खिलाफ आदेश जारी किया था। इस आदेश को उन्होंने रियल एस्टेट अपीलेट अथॉरिटी के समक्ष चुनौती दी थी। याचिका पर सुनवाई नहींं हो सकी क्योंकि अपीलेट अथॉरिटी में अध्यक्ष के अतिरिक्त कोई सदस्य मौजूद नहीं है। रेरा अपीलेट अथॉरिटी के अध्यक्ष के तौर पर रिटायर जज जस्टिस राजन गुप्ता कार्य कर रहे हैं लेकिन सदस्य के बिना वह कोई निर्णय नहीं ले सकते हैं। ऐसे में हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि क्यों सदस्यों की नियुक्ति नहीं की जा रही जबकि सदस्यों के अभाव में ट्रिब्यूनल निष्क्रिय हो गया है। यह भी पूछा है कि प्रदेश में विभिन्न पदों पर नियुक्ति के लिए सेवानिवृत्त एडीजे को जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समकक्ष क्यों नहीं माना जाता, जबकि अन्य सभी राज्य पहले से ऐसा कर रहे हैं। पंजाब भी उन्हें समान दर्जा दे रहा है। रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी की हरियाणा में दो ब्रांच हैं, एक गुरुग्राम में और दूसरी पंचकूला में कार्यरत है। बिल्डरों और ग्राहकों के बीच के विवादों का निपटारा करती है। रेरा के निर्णयों के विरुद्ध अपील रेरा अपीलेट अथॉरिटी के समक्ष की जाती है। इस अथॉरिटी के अध्यक्ष हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश होते हैं। सदस्यों के रूप में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को शामिल किया जाता है। ऐसे में अब हाईकोर्ट ने इनकी अनुपब्लधता की स्थिति में हरियाणा सरकार से पूछा है कि सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला न्यायाधीश को जिला एवं सत्र न्यायाधीश के बराबर योग्यता वाले पद पर नियुक्ति के लिए योग्य क्यों नहीं माना जाता।