ऐसा स्कूल जहां हिंदी का टीचर अंग्रेजी पढ़ा रहा हो, और ड्राइंग का टीचर विज्ञान पढ़ाता है। आपके बच्चे कहीं ऐसे स्कूल में तो नहीं जाते। जी हां ऐसा हो सकता है। सूबे के स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी स्कूलों में बोर्ड परीक्षाओं के बेहद निराशाजनक नतीजों के बाद जिला स्तर पर मांगी रिपोर्ट में काफी हैरानी जनक तथ्य सामने आए हैं।
इसमें सामने आया है कि सरकारी स्कूलों में कई अध्यापक विद्यार्थियों को अपने विषय से हटकर दूसरे विषय पढ़ा रहे हैं। हिंदी विषय का अध्यापक अंग्रेजी पढ़ाता है, जबकि शारीरिक शिक्षा और ड्राइंग विषय के अध्यापक पर गणित पढ़ाने की जिम्मेवारी है। शिक्षा विभाग ने मालवा रीजन से संबंधित अकेले तीन जिलों फरीदकोट, मुक्तसर और बठिंडा में ही ऐसे 234 अध्यापकों की शिनाख्त कर ली है, जबकि बाकी जिलों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
ऐसे कैसे पढ़ेगा इंडिया, हिंदी वाले पढ़ा रहे अंग्रेजी
स्कूल में पढ़ाई करते बच्चे
- फोटो : file photo
ऐसे हालात ज्यादातर ग्रामीण स्कूलों में देखने को मिले हैं। यहां के गांव दबड़ीखाना स्थित सरकारी स्कूल में हिंदी अध्यापक मोहित जैन बीते कई महीनों से बच्चों को गणित पढ़ा रहे हैं। जंडवाला स्कूल में पंजाबी अध्यापिका गुरविंदर कौर विद्यार्थियों को साइंस व गणित पढ़ा रही हैं। गांव शेर सिंह वाला के स्कूल में तो दो हिंदी अध्यापक दविंदर कुमार और इंदु शर्मा के पास 12वीं कक्षा के बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने की जिम्मेवारी है।
फरीदकोट की तरह मुक्तसर जिले के हालात भी काफी खराब हैं। यहां के गांव कट्टेया वाली के स्कूल में शारीरिक शिक्षा, ड्राइंग और पंजाबी विषय के अध्यापक विद्यार्थियों को साइंस, गणित और अंग्रेजी विषय पढ़ा रहे हैं। इस स्कूल में इन जरूरी विषयों का कोई अध्यापक ही नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार इन तीनों जिलों में सौ से भी अधिक सामाजिक शिक्षा के अध्यापक बच्चों को अंग्रेजी और पंजाबी व हिंदी अध्यापकों की ओर से गणित, साइंस और अंग्रेजी पढ़ाई जाती है।
क्या शिक्षकाां की वजह से गिरा है पढ़ाई का स्तर
स्कूल में पढ़ाई करते बच्चे
- फोटो : file photo
विभागीय सूत्रों का दावा है कि इसके पीछे सबसे बड़ी वजह अंग्रेजी, गणित और साइंस अध्यापकों का ग्रामीण क्षेत्र में सेवाएं निभाने से कतराना है। इससे सरकारी स्कूलों का शिक्षा स्तर लगातार गिरता जा रहा है। हालांकि शिक्षा विभाग ने प्रमोशनों समेत नई भर्ती के माध्यम से स्कूलों में अध्यापकों के पदों को भी भरने का प्रयास किया है।
अब तक कई ग्रामीण स्कूलों में अंग्रेजी, गणित और साइंस जैसे अहम विषयों से संबंधित अध्यापकों के पद खाली पड़े हैं। इस मामले में डीईओ (स) दविंदर कुमार रजौरिया ने कहा कि सेकेंडरी शिक्षा विभाग के डायरेक्टर की हिदायत के बाद विभाग ने ऐसे अध्यापकों का डाटा जुटाया है, जो अपने असल विषय से हटकर किसी दूसरे विषय को पढ़ा रहे हैं।