पॉल्यूशन कंट्रोल विभाग से अनुमति लिए बिना ही संचालित हो रहीं सात फैक्ट्रियों पर कार्रवाई की गाज गिरी है।
पॉल्यूशन कंट्रोल विभाग ने इन फैक्ट्रियों को बंद करने के आदेश जारी किए हैं, जिसके तहत दो फैक्ट्री सील भी कर दी गई हैं। बाकी पांच फैक्ट्रियां भी एक-दो दिनों में सील कर दी जाएंगी।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, अगर सील तोड़कर काम किया जाता है तो मामला दर्ज कराया जाएगा।
दरअसल, किसी भी तरह की इंडस्ट्री चलाने के लिए पॉल्यूशन कंट्रोल विभाग की अनुमति लेनी पड़ती है और जरूरी कागजात पूरे करने के बाद ही इंडस्ट्री चलाई जा सकती है।
पिछले दिनों नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आदेश जारी किए थे कि जहां भी विभाग की अनुमति के बगैर फैक्ट्रियां चल रही हैं, उन्हें तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए।
इसके बाद पाल्यूशन विभाग हरकत में आया और सर्च अभियान शुरू किया।
नोटिस पर नहीं लिया संज्ञान
जांच के दौरान प्राथमिक तौर पर सात इंडस्ट्री नियमों की अनदेखी करती पाई गई।
उन्हें पहले नोटिस दिया गया, लेकिन इसके बावजूद भी विभाग से अनुमति नहीं लेने पर विभाग के अधिकारियों ने क्लोजर ऑर्डर की अनुमति के लिए मामला हेडक्वार्टर भेज दिया। वहां से मंजूरी मिलने के बाद बंद करने के आदेश जारी हुए।
इन फैक्ट्रियों पर गाज
हार्वे मेटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
इंजीनियरिंग एंड कंसलटेंट
राणा इंडस्ट्रीज
श्री क्यूर हर्बस
बंसल इंडस्ट्रीज
पशुपति इंडस्ट्रीज
माडर्न मैन्यूफैक्चरर्स
(ये सभी फैक्ट्रियां इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में हैं। इनमें हार्वे मेटल्स और इंजीनियरिंग एंड कंसलटेंट को सील कर दिया गया है)।
ग्रीन कैटेगिरी में हैं ये इंडस्ट्री
पॉल्यूशन कंट्रोल विभाग ने इंडस्ट्री को तीन कैटेगिरी में बांट रखा है। पहली रेड कैटेगिरी, जिसमें ज्यादा पाल्यूशन होता है। दूसरी ग्रीन कैटेगिरी, जिसमें मध्यम स्तर का पॉल्यूशन होता है।
तीसरी ग्रीन कैटेगिरी, जिसमें पॉल्यूशन काफी निम्न स्तर का होता है। उक्त सातों फैक्टरियां ग्रीन कैटेगिरी में हैं।