जानकारी के अनुसार बाल सुधार गृह में बैरक के बाहर एक ग्राउंड है। उस ग्राउंड का भी एक गेट है, जिसे अंदर वाला गेट भी बोला जाता है। उसके बाद मुख्य गेट है। अकसर यह अंदर वाला गेट खुला रहता है। सोमवार को भी यह गेट खुला हुआ था, जिसका फायदा उठाते हुए फरार हुए बाल बंदियों को मुख्य गेट तक पहुंचने में आसानी रही।
विशेषज्ञ की राय: पूछताछ में पुलिस को आएगी दिक्कत
वरिष्ठ अधिवक्ता लाल बहादुर खोवाल के अनुसार नाबालिग के मामले में पकड़ में आने पर भी पुलिस उनके साथ बालिग आरोपी की तरह पेश नहीं आ सकती। कानून के मुताबिक उसे पहले अदालत में पेश करना होता है। अदालत यह देखेगी कि आरोपी 16 से 18 वर्ष के बीच का है और उसने सोच समझकर कोई जघन्य अपराध किया है तो उसके खिलाफ बालिग आरोपी की तरह ही मुकदमा चलाया जाएगा, अन्यथा उसे नाबालिग होने का कानूनी लाभ मिलेगा।
किशोर न्याय अधिनियम में निर्भया कांड के बाद संशोधन किया गया था। उससे पहले 18 वर्ष तक के आरोपी को जुवेनाइल के सारे लाभ मिलते थे, लेकिन संशोधन के बाद जघन्य अपराध के मामलों में उम्र 18 से घटाकर 16 कर दी गई थी। अब पकड़े गए बाल बंदियों के मामले में उनकी उम्र और उनके अपराध के मद्देनजर अदालत फैसला लेगी।
जिसकी गलती होगी उस पर की जाएगी कार्रवाई
बाल सुधार गृह की सुरक्षा व्यवस्था की पुनर्समीक्षा की जाएगी। घटना के कारणों का पता लगाते हुए गहनता से छानबीन होगी। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था में खामियों के संबंध में हाईकोर्ट को लिखा जाएगा। - ज्योति बैंदा, चेयरपर्सन, बाल संरक्षण आयोग, हरियाणा।
तीन पकड़ लिए है, बाकी की तलाश की जा रही है
बाल सुधार गृह से फरार हुए 17 बाल बंदियों में से तीन को गिरफ्तार कर लिया गया है। इनमें एक चौधरीवास और एक तलवंडी राणा से पकड़ा गया है, जबकि तीसरा हांसी पुलिस द्वारा पकड़ा गया है। अन्य को भी पकड़ने के लिए सघन अभियान चलाया जा रहा है। - डॉ. प्रियंका सोनी, उपायुक्त, हिसार।