प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमृतसर पहुंचे
भारत की मेजबानी में पहली बार अमृतसर में शुरू हुई छठी मिनिस्टीरियल कांफ्रेंस हार्ट ऑफ एशिया इंस्ताबुल प्रोसेस में हिस्सा लेने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमृतसर पहुंच चुके है। यहां पीएम का स्वागत खुद पंजाब के सीएम प्रकाश सिंह बादल और डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल ने किया। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल, पंजाब भाजपा अध्यक्ष विजय सांपला और जनरल वीके सिंह मौजूद थे। सम्मेलन में अधिकारी की स्तर की वार्ता शुरू हो गई है। यह सम्मेलन अफगानिस्तान पर इस्तांबुल प्रक्रिया का हिस्सा है।
मुख्य सम्मेलन रविवार को शुरू होगा। इसका शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी करेंगे। अफगानिस्तान 'हार्ट ऑफ एशिया' का स्थायी अध्यक्ष है जबकि भारत इस साल सह-अध्यक्ष होने के नाते सम्मेलन का मेजबान है। मंत्री स्तरीय सम्मेलन की सह अध्यक्षता जेटली और अफगान विदेश मंत्री करेंगे।
वित्तमंत्री अरुण जेटली इस सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज बीमार होने के कारण इसमें भाग नहीं ले रही हैं। सम्मेलन में पाकिस्तान, चीन, ईरान, रूस और अफगानिस्तान सहित करीब 40 देश भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के लिए गुरुनगरी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
14 देशों के प्रतिनिधि ले रहे हैं हिस्सा
अमृतसर में हार्ट ऑफ एशिया कांफ्रेंस
कांफ्रेंस में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर पीएम मोदी और अफगानिस्तान के प्रतिनिधि पड़ोसी देश को घेरने की तैयारी में है। चूंकि, अफगानिस्तान और भारत आतंकवाद से सबसे अधिक प्रभावित देश हैं। अफगानिस्तान के साथ कनेक्टिविटी बढ़ाकर व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देना भी मुख्य एजेंडा रहेगा।
पाकिस्तान के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज रविवार को इस सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं। अजीज की अमृतसर यात्रा से पहले भारत ने कहा था कि वह पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों में सीमा पार आतंकवाद की निरंतरता को नई सामान्य स्थिति के रूप में कभी स्वीकार नहीं करेगा।
भारत ने स्पष्ट किया कि निरंतर आतंकवाद के माहौल में वार्ता नहीं हो सकती। भारत ने उरी में सैन्य ठिकाने पर हमले के बाद पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने करने का आह्वान किया था। हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में उसी दिशा में अपना प्रयास जारी रख सकता है।
इसमें तीस देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। इसके अलावा अमेरिका, चीन, पाकिस्तान, रूस और इरान के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। पूरी उम्मीद है कि सम्मेलन के घोषणा पत्र के जरिए पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद पर कड़वे अनुभव का अहसास कराया जाएगा।