उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि आप बेहतर इलाज करने का तरीका साइंस एवं टेक्नोलॉजी में ढूंढ सकते हैं। पीने के पानी की समस्या से निपटने के लिए रीसाइकिल एवं कंजर्वेशन से जुड़ी नई तकनीक विकसित कर सकते हैं। यह बड़ी चुनौती है कि क्या हम कोई ऐसा सिस्टम बना सकते हैं जिससे हमारे संवेदनशील संस्थानों को ऐसी साइबर सुरक्षा मिल सके कि उसे भेदना नामुमकिन हो जाए।
उन्होंने कहा, क्या हम सौर ऊर्जा के क्षेत्र में ऐसे समाधान कर सकते हैं, जो बहुत ही कम कीमत पर गरीब से गरीब व्यक्ति के लिए भी उपलब्ध हो सकें। हमें दुनिया में लीडरशिप लेनी है और अपने संकल्पों को पूरा करके दिखाना है। हमें समय के अनुरूप समस्याओं का समाधान करने होंगे, वह भी समय सीमा के अंदर। 2018 भारत के विज्ञान के लिए बहुत ही अच्छा साल रहा।
दवा के क्षेत्र में उपकरण सस्ते दामों में उपलब्ध कराने के लिए अच्छी पहल हुई है। हमें दुनिया में प्रतिस्पर्धा नहीं करनी है श्रेष्ठता दिखानी है। हमें देश को उस स्तर पर ले जाना है जिससे दुनिया भारत के पीछे चले। हमारा प्राचीन ज्ञान शोध पर ही आधारित रहा है। हमारे वैज्ञानिक ऐसी जीन थेरेपी की खोज कर रहे हैं जिससे खून में हीमोग्लोबीन कम होने की समस्या समाप्त हो।
देश की बड़ी आबादी एनीमिया यानी खून की कमी से जूझ रही है। भारत के तीन अंतरिक्ष यात्रियों को गगनयान के जरिए 2022 में अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी चल रही है। इसरो ने इसके लिए विशेष टेक्नोलॉजी तैयार की है।
केंद्रीय मंत्री हर्षवर्द्धन ने देश में विज्ञान के क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विज्ञान का आम लोगों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न मिशन शुरू किए हैं। इससे करोड़ों भारतीयों को लाभ हो रहा है। इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री विजय सांपला, राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर के अलावा उद्योग मंत्री शाम सुंदर भी मौजूद थे।