चंडीगढ़ सेक्टर-17 का प्लाजा शहर का एक प्रमुख व्यापारिक और पर्यटन केंद्र है, आज दो विपरीत चेहरों का प्रतीक बन चुका है। प्लाजा में एक तरफ साफ-सफाई और चहल पहल रहती है लेकिन दूसरी तरफ सन्नाटा पसरा रहता है।
वहां गंदगी की भरमार है। रास्तों की टाइलें टूटी हुई हैं। जगह-जगह झाड़ियां उगी हुई हैं, अतिक्रमण हैं। ऐसा लगता ही नहीं है कि ये भी प्लाजा का ही हिस्सा है। प्रशासन की नजरें भी उस ओर नहीं पड़ती हैं। प्रशासन और नगर निगम का ध्यान भी सिर्फ फाउंटेन तक के प्लाजा के हिस्से पर ही रहता है। वहीं सारे कार्यक्रम होते हैं और विकास के नए प्रोजेक्ट भी उसी हिस्से के लिए आते हैं। ब्रिज मार्केट के दूसरी तरफ के इलाके तो साफ-सफाई के लिए भी तरस रहे हैं। जैसे ही आप इस हिस्से में कदम रखते हैं, आपको बिखरी हुई गंदगी और टूटी हुई टाइलें दिखाई देने लगती हैं। जगह-जगह झाड़ियां उगी हुई हैं और लंबे समय से किसी ने इनकी देखरेख नहीं की है। कुछ स्थानों पर अवैध कब्जे भी दिखने को मिलते हैं, जो इस क्षेत्र की दुर्दशा को और बढ़ाते हैं।
प्लाजा का यह हिस्सा ऐसे लगता है मानो प्रशासन की नजरों से ओझल हो गया हो। प्लाजा में एक तरफ जीवन से भरा माहौल है, वहीं दूसरी तरफ सन्नाटा पसरा रहता है। स्थानीय दुकानदार और निवासी इस असमानता से परेशान हैं। उनका कहना है कि सेक्टर-17 को चंडीगढ़ के ‘हार्ट’ के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसकी बदहाल स्थिति इस छवि को नुकसान पहुंचा रही है।
प्लाजा का वो हिस्सा जो मध्य मार्ग की तरफ पड़ता है, उसकी स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। रात में लाइटें भी नहीं जलती। कई जगहों पर अंधेरा पसरा रहता है। महिलाओं के लिए यह हिस्सा बिल्कुल सुरक्षित नहीं है। इमारतों के गलियारों में लोगों के कब्जे हैं, जहां वो रहते हैं और वहीं खाना भी बनाते हैं। जगह-जगह बिखरी हुई गंदगी और टूटी-फूटी टाइलें साफ नजर आती हैं। सवाल यह उठता है कि शहर के महत्वपूर्ण जगह की ऐसी दुर्दशा क्यों हो रही है और क्या प्रशासन इस समस्या को नजरअंदाज कर रहा है, जबकि यह क्षेत्र चंडीगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित हिस्सों में गिना जाता है। शहरवासी और दुकानदारों की नजरें प्रशासन की ओर हैं, जो उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही इस समस्या का समाधान निकाला जाएगा, ताकि सेक्टर-17 का हर कोना उस चहल-पहल और सुंदरता का हिस्सा बने जिसके लिए यह प्लाजा जाना जाता है।