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अव्यवस्थाओं ने ली खिलाड़ी की जान, कबड्डी मैच खेलते बेहोश हुआ था

Wed, 10 Aug 2016 09:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पटियाला(पंजाब)
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jalandhar kidnapping case - फोटो : amar ujala
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अव्यवस्थाओं और लापरवाही का अंजाम छात्र को जान देकर भुगतना पड़ा। वह कबड्डी मैच खेलते हुए बेहोश हो गया था। मामला पंजाब के पटियाला का है। पासी रोड स्थित सरकारी मल्टीपर्पस सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित कबड्डी के अंडर-19 जोनल मुकाबलों में मैच खेलते समय मंगलवार दोपहर एक छात्र अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा। काफी समय तक कोच उसके हाथ-पैर मलते रहे।
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सुधार न होता देख छात्र को सद्भावना अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पूरे मामले में स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग की लापरवाही सामने आ रही है। जिस समय यह सब हुआ स्कूल ग्राउंड पर न तो खिलाड़ियों के लिए पीने का पानी था और न ही मेडिकल टीम। यही नहीं, प्राथमिक चिकित्सा की भी सुविधा नहीं थी। सरकारी मल्टीपर्पस स्कूल में कबड्डी के अंडर-19 वर्ग के जोनल मुकाबले चल रहे हैं।

मंगलवार दोपहर को मैच खेलते समय पटियाला के मालवा सीनियर सेकेंडरी स्कूल जसोवाल का 18 साल का छात्र सुखजिंदर सिंह अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा। काफी देर तक तो कोच ही उसके हाथ-पैर मलते रहे लेकिन उसे होश नहीं आया। इसके बाद साथी छात्रों ने सुखजिंदर को नजदीक के सद्भावना अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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मृतक के पिता सिविल लाइन थाने में हेड कांस्टेबल

कबड्डी प्रतियोगिता में अंबारी विजेता - फोटो : अमर उजाला
सुखजिंदर सिंह भादसों रोड के पास खालसा नगर का रहने वाला था। उसके पिता नेकी राम सिविल लाइन थाने में हेडकांस्टेबल हैं। मौत से पहले वह हाफ मैच खेल चुका था। वह इस मैच में जाफी था और उसने 11 जाफी व 13 बार विरोधी टीम के खिलाड़ियों को टच किया था। यहां स्कूल की लापरवाही भी सामने आती है। जब उसे दौरे पड़ते थे तो उसे कबड्डी का मैच खेलने क्यों भेजा गया।

वहीं स्कूल कोच प्रितपाल सिंह का कहना है कि यदि मैच खेलते समय एक छात्र की मौत हो गई तो इसमें स्कूल की क्या गलती है। उधर, सिविल लाइन थाना इंचार्ज जसविंदर सिंह टिवाना का कहना है कि उन्हें इस हादसे के बारे में पता ही नहीं है जबकि मरने वाले छात्र के पिता इसी थाने में तैनात हैं।   

जोनल स्तर के मुकाबलों में कोई डॉक्टर बगैरह मुहैया नहीं कराया जाता है। ग्राउंड पर फर्स्ट एड बॉक्स रहता है और कोच को प्राथमिक चिकित्सा देना सिखा दिया जाता है। मैच खेलते समय खिलाड़ी की मौत होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
- हरविंदर कौर, जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी) 
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