चंडीगढ़। संगीता एक्टिंग स्टूडियो ने रूपक कला एंड वेलफेयर सोसाइटी के साथ मिलकर शनिवार को पंजाब कला भवन में पंजाबी नाटक नसलघात का मंचन किया। नाटक के मुख्य पात्र कारी के पिता गांव में ढोल बजाते हैं, लेकिन गरीबी के कारण जब कारी छोटा होता है, तभी उसके पिता ढोल बजाते-बजाते उसे बेचने के लिए निकल जाते हैं। इस दौरान गांव का एक मास्टर कारी को रख लेता है कि ये मेरे यहां काम कर लेगा और मैं इसे पढ़ा भी दूंगा। गरीबी के कारण कुछ समय बाद कारी के माता-पिता की मौत हो जाती है।
माता-पिता की मौत के बाद मास्टर कारी से मजदूरों की तरह काम लेता है और न ही उसकी पढ़ाई करवाता है। इस दौरान कारी का एक दोस्त कालू बनता है जो उसे चोरी के काम में लगा देता है और मास्टर के चंगुल से निकाल लेता है। कारी गांव की एक विधवा बल्ली के साथ रहने लगता है, जो उसका ध्यान रखती है। एक बार बड़ी चोरी के अपराध में गांव से कारी को निकाल दिया जाता है। कारी शहर में चोरी करते हुए भटकता है। कुछ समय बीतने के बाद कारी बल्ली से मिलने गांव आता है और उसे अमीर बनने के तरीके का सुझाव देता है, लेकिन बल्ली इस पर राजी नहीं होती, कारी नहीं मानता और शहर जाकर आपरेशन के माध्यम से खुद को किन्नर बना लेता है। निर्देशक संगीता ने बताया कि हमने इसमें गरीब लोगों के संघर्ष को दिखाने का प्रयास करते बताया है कि गरीब आदमी किस तरह अपनी जिंदगी सुधारने के लिए कुछ भी काम करने के लिए तैयार हो जाता है।