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नाट्य संध्या में सामने आया औरत का ‘और एक सच’

Sat, 15 Feb 2014 02:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ साहित्य अकादमी की ओर से आयोजित तीन दिनी नाटक उत्सव में शुक्रवार शाम पहला नाटक ‘और एक सच’ टैगोर थिएटर में मंचित हुआ।
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इप्टा संस्था के सदस्य और नाटक के निर्देशक अजीज कुरैशी ने इस नाटक को लिखा भी था। नाटक को थिएटर से थोड़ा अलग एक्सपेरीमेंट करते हुए वीडियो दिखाकर शुरू किया।

इसमें एक औरत और समय के बीच संवाद हुआ। औरत अपने को मादा और समय को अपने से बलवान बताती है, इसके आगे कहानी स्टेज में कलाकारों ने निभाई। कहानी में एक लड़की की छोटी उम्र में शादी होती है। वह उससे शारीरिक संबंध बनाने की बात करता है, लेकिन लड़की के न मानने पर वह उससे जबरदस्ती करता है, जिससे लड़की की मौत हो जाती है। दूसरी कहानी एक शादीशुदा औरत की है जिसे गांव वाले बच्चा न पैदा कर पाने की सूरत में काफी बुरा भला सुनाते हैं और उसकी सास को उसे एक बाबा को दिखाने को कहते हैं।
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बाबा उससे जबरदस्ती करने की कोशिश करता है लेकिन लड़की के मना करने पर उसी को बदनाम कर देता है। तीसरी कहानी दो औरतों की है जो उम्रदराज हैं और अपने जीवन में हुई घटनाओं को बताती है और सिर्फ दूसरों के लिए जीने की बात ही करती है जिससे उनकी अपनी जिंदगी कही खो सी गई लगती है।  
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नाटक में अगर एक्टिंग को देखा जाए तो वह बहुत साधारण रही। सिर्फ बाबा और पति की भूमिका में अजीज कुरैशी ही कुछ छाप छोड़ पाए हालांकि बुजुर्ग के किरदार में थोड़ा अच्छा अभिनय सामने आया, लेकिन कमजोर संवाद ने सीन को लंबा और नीरस बना दिया। नाटक की लिखावट बेहद आम थी जिसमें संवादों को बेहद सपाट रखा। नाटक में लाइट और साउंड का इस्तेमाल अच्छा था। नाटक को देखने 40-50 लोग ही आए।
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