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कोरोना संक्रमणः प्लाजमा थैरेपी के ट्रायल को नहीं मिल रहे हैं गंभीर मरीज, 7 लोग कर चुके डोनेट

Sat, 06 Jun 2020 01:41 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्लाज्मा थेरैपी - फोटो : social media
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कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए पीजीआई को प्लाज्मा थैरेपी के ट्रायल की अनुमति तो मिल गई है लेकिन आईसीएमआर के मानकों के अनुसार गंभीर मरीज नहीं मिलने के कारण ट्रायल में देरी हो रही है। पीजीआई के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के डॉक्टरों की टीम ट्रायल करने में जुटी हुई है।
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टीम के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. आरआर शर्मा का कहना है कि मानकों के अनुसार कोरोना के जिन मरीजों में कफ, बुखार के साथ ही ऑक्सीजन लेने में परेशानी हो, उन्हें ही ट्रायल में शामिल किया जा सकता है। पीजीआई में भर्ती लगभग 99% मरीज इन मानकों पर रिजेक्ट हो चुके हैं।

वहीं प्लाज्मा डोनरों के लिए भी ऐसेे ही मानक हैं। इसके अनुसार वे मरीज ही प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं जिन्हें कोरोना पॉजिटिव होने के दौरान कफ, बुखार और सांस लेने में तकलीफ थी। जिन 7 मरीजों ने पीजीआई को अपना प्लाज्मा डोनेट किया है, वे सभी इन मानकों में खरे उतरे हैं।
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मिल चुके हैं 7 डोनर
कोरोना के इलाज के लिए प्लाजमा थैरेपी के ट्रायल की अनुमति मिलने के बाद पीजीआई को अब तक कोरोना के ठीक हो चुके 7 मरीजों ने प्लाज्मा डोनेट किया है और उसे सुरक्षित कर लिया गया है। पीजीआई के कोरोना डेडीकेटेड हॉस्पिटल की आईसीयू में भर्ती एक गंभीर मरीज पर इसका ट्रायल 2 दिन पहले शुरू किया जा चुका है।

ट्रायल कर रही टीम के अनुसार उस मरीज में आईसीएमआर के मानक के अनुसार कफ और बुखार होने के साथ ही ऑक्सीजन लेने में परेशानी के लक्षण पाए गए हैं इसलिए उसे प्लाज्मा का डोज देकर परिणाम की मॉनीटिरिंग शुरू कर दी है। टीम का कहना है कि ट्रायल के सही आंकलन के लिए अन्य मरीजों की भी जरूरत होगी जिसके आधार पर तुलनात्मक अध्ययन किया जा सके।
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ट्रायल के लिए पीजीआई को चुना गया

डॉ. जगतराम ने बताया कि कोरोना के इलाज के लिए पीजीआई में प्लाज्मा थैरेपी का ट्रायल शुरू कर दिया गया है। इसके लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने पीजीआई को अनुमति दी है। एक मरीज को इसका डोज दिया गया है।

ट्रायल के दौरान पीजीआई कोरोना वायरस से संक्रमित गंभीर मरीजों का इलाज प्लाज्मा थैरेपी के जरिए करेगा। मानक के अनुसार एक मरीज मिलने के बाद ट्रायल शुरू कर दिया गया है। अब आगे जैसे-जैसे मरीज मिलते जाएंगे, उन्हें इसमें शामिल किया जाएगा। फिर उनको दो वर्गों में बांटकर इस तकनीक के परिणाम का आंकलन किया जाएगा।

कोरोना का मरीज ही दूसरे मरीज की बनेगा दवा
पीजीआई के डायरेक्टर डॉ. जगतराम ने बताया कि प्लाज्मा थैरेपी एक ऐसी तकनीक है जिसके जरिए एक ठीक हुए मरीज के शरीर से एंटीबॉडी यानी कि रोग प्रतिकारक को कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज के अंदर ट्रांसफर कर दिया जाता है। यह कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज के अंदर प्रवेश करने के बाद वायरस के कीटाणुओं से लड़ता है और मरीज को वायरस से बचाता है।

प्लाज्मा थैरेपी का पहले भी रहा है बेहतर परिणाम
कोरोना के इलाज के लिए ट्रायल की अनुमति मिलने से पहले भी प्लाज्मा थैरेपी से कुष्ठ जैसी कई प्रकार की गंभीर बीमारियों को काबू पाने में अच्छा परिणाम मिला है। ऐसे में कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थैरेपी के ट्रायल की अनुमति मिलने से एक आशा की किरण जगी है।

कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थैरेपी कारगर साबित हो सकती है। महाराष्ट्र और चेन्नई में मानक के अनुसार मरीज मिलने से इसका ट्रायल अच्छा चल रहा है। पीजीआई को भी एक मरीज मिला है। उस पर ट्रायल शुरू कर दिया गया है।
- डॉ. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई
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