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अमर उजाला पड़ताल: ठंडे बस्ते में पीजीआई की अपनी फार्मेसी खोलने की योजना, मरीज लगा रहे निजी दुकानों के चक्कर

Sun, 11 Sep 2022 04:36 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पीजीआई की अपनी फार्मेसी के लिए डॉ. अरविंद राजवंशी के नेतृत्व में कार्य योजना बनाई गई थी। 2018 में वह स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन थे। कमेटी की बैठक में योजना को पास कर दिया गया था। वहीं इसके लिए बजट भी जारी कर दिया गया था।
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चंडीगढ़ का पीजीआई अस्पताल - फोटो : PTI
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विस्तार
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चंडीगढ़ पीजीआई में निजी दवा की दुकान की बेहोशी की गलत दवा से मरीजों की जान जाने की बात सामने आ रही है। ऐसी घटनाओं पर रोक के लिए ही पीजीआई प्रशासन ने 2018 में अपनी फार्मेसी शुरू करने की योजना बनाई थी लेकिन यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई है। 

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खास बात यह है कि इसके लिए पीजीआई प्रशासन ने नेहरू अस्पताल परिक्षेत्र में फार्मेसी काउंटर बनाने के साथ ही सीसीटीवी कैमरे भी लगा दिए थे। बल्क में आने वाली दवाओं को रखने के लिए नशा उन्मूलन केंद्र के पास बेसमेंट में वेयर हाउस भी बना लिया गया था। बस साफ्टवेयर और मानव संसाधन की व्यवस्था बची थी लेकिन योजना के सूत्रधारों के जाने के बाद इसे दरकिनार कर दिया गया। 

उस दौरान लखनऊ एसजीपीजीआई और पुंडुचेरी के जवाहर लाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च में संचालित अपनी फार्मेसी के मॉडल को समझने के लिए पीजीआई चंडीगढ़ की टीम ने वहां दौरा भी किया था लेकिन सारी योजनाएं धरी की धरी रह गईं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मरीजों को दी जाने वाली दवाओं की आपूर्ति पीजीआई अपने स्तर पर करता तो मरीजों को सस्ते दर पर गुणवत्तायुक्त दवाएं मिलती हैं और इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगता। 

बजट भी हो गया था पास, फिर कहां फंस गया पेंच 

पीजीआई की अपनी फार्मेसी के लिए डॉ. अरविंद राजवंशी के नेतृत्व में कार्य योजना बनाई गई थी। 2018 में वह स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी के चेयरमैन थे। कमेटी की बैठक में योजना को पास कर दिया गया था। वहीं इसके लिए बजट भी जारी कर दिया गया था। इसके तहत पहले वार्डों में फार्मेसी खोली जानी थी जिससे मरीज को वार्ड में दवाओं की आपूर्ति की जाती। उन दवाओं का बिल मरीज के फाइनल बिल में जोड़ दिया जाता। इसके साथ ही मरीजों को केवल प्रशासनिक चार्ज जोड़कर सस्ते दर पर दवाइयां मुहैया कराई जानी थी। दवा के साथ सर्जिकल आइटम की भी आपूर्ति होनी थी लेकिन शुरुआती रफ्तार के बाद योजना पर ब्रेक लग गया है। 

फिर मरीजों के बेड पर पहुंचती दवा 

योजना के तहत पीजीआई में अपनी फार्मेसी खुल जाने पर मरीजों के बेड साइड पर ही दवा पहुंचती। डॉक्टर उसे लिखकर देते और फार्मेसी से उसकी सीधे आपूर्ति की जाती। इससे जहां एक ओर मरीजों के परिजनों को दवा के लिए यहां-वहां चक्कर लगाने की नौबत नहीं आती, वहीं गड़बड़ दवाओं की आपूर्ति का खतरा भी न के बराबर होता। फार्मेसी की योजना ठप होने से इन सुविधाओं की शुरुआत होने की उम्मीद भी धीरे-धीरे खत्म होने लगी है। 

सर्जिकल स्टोर को लेकर पहले से है बवाल 

गौरतलब है कि पीजीआई में सर्जिकल स्टोर को लेकर पहले से ही बचाल मचा हुआ है। उस स्टोर को 24 घंटे खोलने के लिए लगातार मांग होने पर भी पीजीआई प्रशासन अब तक उसे खोलने का आदेश जारी नहीं कर पाया है। इस कारण शाम 5 बजे के बाद उस स्टोर के बंद हो जाने से मरीजों को बाहर की दुकानों से सर्जिकल आइटम कई गुना ज्यादा दर पर खरीदना पड़ रहा है। 

कई प्रदेशों के लाखों मरीज आ रहे इलाज के लिए 

पीजीआई में देश के सात से ज्यादा प्रदेशों के मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के मरीज शामिल हैं। इसके अतिरिक्त राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल और नेपाल के भी काफी मरीज इलाज के लिए पीजीआई आते हैं। 

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राज्य                   मरीज            प्रतिशत
पंजाब               1087420         19.0
चंडीगढ़             546468           37.9
हरियाणा            541764           18.9
हिमाचल प्रदेश     359273           12.5
उत्तर प्रदेश         133554            4.7
जम्मू कश्मीर       74131             1.2
अन्य राज्य         91970              3.2
 

इसे लेकर तीन बैठकें हो चुकी हैं। इसके लिए कई चरण में काम होना है। इसके लिए एसजीपीजीआई का फॉर्मूला भी डिसकस किया था। कुछ विभागों से पैकेज भी लिए गए थे। अब भी काम जारी है।  -कुमार गौरव, डीडीए व प्रवक्ता पीजीआई

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