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यदि आप पितृदोष शांत करना चाहते हैं ये पढ़ें

Sat, 25 Jan 2014 01:01 PM IST
नीरज कुमार/अमर उजाला, चंडीगढ़
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इस वर्ष मौनी अमावस्या पर पुत्र जयंती योग बन रही है। 30 जनवरी को मौनी अमावस्या है। यह बात सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कही।
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उन्होंने कहा कि 30 जनवरी दिन वीरवार को सुबह 6 बजकर 31 मिनट पर मकर लग्न में मौनी अमावस्या का शुभारंभ हो रहा है। लग्न का स्वामी शनि उच्च का होकर दशमभाव में है।

लग्न में सूर्य चंद्रमा के साथ होने के कारण यह योग पुत्र जयंती योग बन रहा है। मिश्रा ने कहा कि माघ मास में मौनी अमावस्या का बहुत महत्व है।

पुराणों में ऐसा वर्णन है कि यदि किसी के अकाल मृत्यु हुआ है यदि कुंडली में पितृदोष हो या अकालमृत्यु के कारण किसी के घर में सुख शांति न हो तो उसे विष्णु सहस्र नाम का पाठ, पितृ सुक्त का पाठ या पितृ गायत्री का पाठ करने से घर में सुख शांति रहती है। राजदरबार से भी लाभ मिलता है।
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पुत्र जयंती योग में सुबह मौन रहकर स्नान करने के बाद जिसकी शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या या शनि की महादशा या अंतर्दशा हो उन्हें काला तिल, काले तिल का लड्डू, तिल का तेल, काली माह, काला कंबल ब्राह्मण या साधु व गरीबों को दान करनी चाहिए।

सेक्टर-18 स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी लाल बहादुर दुबे, सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री और सेक्टर-15 के जय श्री राम ज्योतिष केंद्र के प्रमुख स्वामी राम बहादुर मिश्रा के अनुसार जिस व्यक्ति के कुंडली में चंद्रमा और शुक्र की महादशा या अंतर्दशा हो तो उन्हें सफेद तिल, चावल, चीनी, सफेद वस्त्र दान करनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि पितरों की सुख शांति एवं पितर दोष के लिए ब्राह्मण को भोजन कराकर कंबल एवं वस्तु दान करने से पितृदोष शांत होता है।
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