याचिका के अनुसार भारत में हर दिन 1374 सड़क हादसे होते हैं जिनमें 400 लोगों की जान चली जाती है। स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ती जा रही हैं। सड़क हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही हैं।
मरने वालों में से 54 फीसदी लोगों की उम्र 34 साल से भी कम होती हैं क्योंकि सड़क हादसे में देश के जितने लोगों की जान जा रही है, उतने लोग किसी युद्ध और आतंकी घटना में भी नहीं मरते।
याचिका में बताया गया कि 100 में से 77 सड़क हादसों में गाड़ी चलाने वाले की ही गलती होती हैं। और उसमें भी सबसे ज्यादा हादसे ओवर स्पीडिंग से हुई। एक ही जगह पर लगातार हादसे होते रहते हैं और सड़क की डिजाइन में खामी इसकी बड़ी वजह हैं।
याचिकाकर्ता ने हरियाणा के नूंह अलवर रोड का हवाला देते हुए बताया कि पिछले दस साल में इस रोड पर 1581 मौत व लगभग 4000 के करीब लोग घायल हो चुके हैं।
यह दुर्घटना संभावित रोड हैं क्योंकि तकनीकी तौर पर इस रोड में खामी हैं लेकिन फिर भी सरकार रोड सेफ्टी पर काम नहीं कर रही। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग कि हैं कि वो सरकार को निर्देश दे के राज्य के 11000 के करीब दुर्घटना संभावित रोड हैं उनको तकनीकी तौर पर सही करवाया जाए व ट्रामा सेंटर की संख्या व सुविधा बढ़ाने के साथ ट्रैफिक नियमों की पालना करवाना सुनिश्चत करवाया जाए।