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सड़क दुर्घटनाओं में मौत को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

Sun, 07 Jul 2019 05:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
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demo pic - फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा में रोजाना कहीं न कहीं डेढ़ घंटे में एक मौत सड़क दुर्घटना से हो रही हैं। यह दर हर साल बढ़ रही हैं। लेकिन हरियाणा सरकार सड़क सुरक्षा के लिए फिर भी गंभीर नही हैं। 

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कागजों में रोड सेफ्टी के लिए सरकार ने राज्य व जिला स्तर पर कमेटियों का गठन तो कर दिया लेकिन जमीनी स्तर पर कमेटी ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे सड़क दुर्घटना में कुछ कमी आई हो। इस मामले पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई हैं।

हाईकोर्ट के वकील मोहम्मद अरसद ने द्वारा दायर याचिका में बताया गया हैं कि राज्य में सड़क दुर्घटना से जितनी मौत होती हैं उनमें 90 प्रतिशत से अधिक में मौत समय पर उचित इलाज न मिलने के कारण होती हैं। 
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इसलिए राज्य के सभी मार्गो पर ट्रामा सेंटर बनाए जाए। राज्य में एक व्यापक सड़क सुरक्षा नीति तैयार करना आवश्यक है जो सड़क इंजीनियरिंग, यातायात प्रबंधन, वाहन विनियम और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित योजना और विधानों की परिकल्पना करती है।

याचिका में बताया गया कि फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस भी सड़क हादसे की एक बड़ी वजह है। एक बड़ा कारण ये भी सामने आया है कि देश की कुछ सड़कों पर ही जरूरत से ज्यादा ट्रैफिक का बोझ है।

 देश की सिर्फ 2 प्रतिशत सड़कें ऐसी हैं जिन पर 40 फीसदी ट्रैफिक का बोझ है। हादसों के लिए बदनाम ब्लैक स्पॉट्स की पहचान करके उन्हें ठीक करने के लिए काम किया जाए।

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भारत में हर दिन होते हैं 1374 सड़क हादसेः याचिका

याचिका के अनुसार भारत में हर दिन 1374 सड़क हादसे होते हैं जिनमें 400 लोगों की जान चली जाती है। स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ती जा रही हैं। सड़क हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही हैं।

मरने वालों में से 54 फीसदी लोगों की उम्र 34 साल से भी कम होती हैं क्योंकि सड़क हादसे में देश के जितने लोगों की जान जा रही है, उतने लोग किसी युद्ध और आतंकी घटना में भी नहीं मरते।

याचिका में बताया गया कि 100 में से 77 सड़क हादसों में गाड़ी चलाने वाले की ही गलती होती हैं। और उसमें भी सबसे ज्यादा हादसे ओवर स्पीडिंग से हुई। एक ही जगह पर लगातार हादसे होते रहते हैं और सड़क की डिजाइन में खामी इसकी बड़ी वजह हैं। 

याचिकाकर्ता ने हरियाणा के नूंह अलवर रोड का हवाला देते हुए बताया कि पिछले दस साल में इस रोड पर 1581 मौत व लगभग 4000 के करीब लोग घायल हो चुके हैं। 

यह दुर्घटना संभावित रोड हैं क्योंकि तकनीकी तौर पर इस रोड में खामी हैं लेकिन फिर भी सरकार रोड सेफ्टी पर काम नहीं कर रही। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग कि हैं कि वो सरकार को निर्देश दे के राज्य के 11000 के करीब दुर्घटना संभावित रोड हैं उनको तकनीकी तौर पर सही करवाया जाए व ट्रामा सेंटर की संख्या व सुविधा बढ़ाने के साथ ट्रैफिक नियमों की पालना करवाना सुनिश्चत करवाया जाए।
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