याचिका में कहा गया है कि सेक्टर-34 सहित ट्राइसिटी के कई बाजारों में दुकानदार न केवल शटर से बाहर तक सामान और विज्ञापन सामग्री फैला रहे हैं बल्कि कई स्थानों पर अतिरिक्त निर्माण कर सार्वजनिक मार्गों को संकरा बना दिया गया है।
चंडीगढ़ के बाजारों में पैदल यात्रियों के लिए बने फुटपाथों और सार्वजनिक पथों पर दुकानदारों के अतिक्रमण के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। इस पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम को फटकार लगाते हुए नोटिस जारी किया है।
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हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई को टालते हुए अब अगली सुनवाई पर निगम को अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई कर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने सेक्टर-34 को एक नमूना क्षेत्र बताते हुए अदालत के समक्ष पेश किया। हाईकोर्ट में फोटो, आरटीआई दस्तावेज आदि पेश कर आरोप लगाया कि दुकानदार अपनी दुकानों की सीमाओं से आगे बढ़कर फुटपाथों तक पर कब्जा कर रहे हैं जिससे पैदल चलने वालों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
सेक्टर-34 सहित ट्राइसिटी के कई बाजारों में दुकानदार न केवल शटर से बाहर तक सामान और विज्ञापन सामग्री फैला रहे हैं बल्कि कई स्थानों पर अतिरिक्त निर्माण कर सार्वजनिक मार्गों को संकरा बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल एक सेक्टर तक सीमित नहीं बल्कि व्यापक सार्वजनिक समस्या है जबकि नगर निगम और उसका प्रवर्तन तंत्र कार्रवाई करने में विफल रहा है।
याचिका सार्वजनिक महत्व का मुद्दा उठाती है
हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या सार्वजनिक फुटपाथों पर ऐसा उपयोग किसी भी नगरपालिका कानून के तहत अनुमत है। प्रारंभिक बहस में याचिकाकर्ता संबंधित वैधानिक प्रावधान तुरंत प्रस्तुत नहीं कर सके जिस पर अदालत ने उन्हें स्पष्ट कानूनी आधार दिखाने को कहा। बाद में पंजाब म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1976 की धारा 44 का हवाला दिया गया जिसके तहत सार्वजनिक सड़कों, गलियों, पुलों, पथों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर अतिक्रमण हटाना निगम की वैधानिक जिम्मेदारी बताई गई।
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अदालत ने टिप्पणी की कि यह सामान्य जानकारी का विषय है कि कई दुकानदार अपनी व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार निर्धारित सीमा से बाहर कर फुटपाथों तक कर लेते हैं जबकि ये स्थान केवल पैदल यात्रियों के उपयोग के लिए हैं। हाईकोर्ट ने माना कि याचिका प्रथम दृष्टया सार्वजनिक महत्व का मुद्दा उठाती है।