चंडीगढ़ के हेरिटेज फर्नीचर के बाद अब शहर की अन्य विरासतों को भी विदेशों में नीलाम किया जा रहा है। बुधवार शाम को स्पेन में साल 1964 के चंडीगढ़ के तत्कालीन चीफ आर्किटेक्ट एंड टाउन प्लॉनिंग एडवाइजर पियरे जेनरे के साइन किए हुए एक पत्र की नीलामी की गई। बोली लगाकर इस पत्र को 340 यूरो (37 हजार 975 रुपये) में बेचा गया। बता दें कि इसकी जानकारी होने के बावजूद चंडीगढ़ प्रशासन नीलामी नहीं रोक पाया।
यह पत्र पियरे जेनरे ने 18 जुलाई 1964 को कोलकाता में एक पत्रकार संतोष घोष को लिखा था। इसके अलावा इस पत्र की एक कॉपी स्विट्जरलैंड में पत्रकार एंथनी क्रेफिट को भी भेजा था ताकि इस पत्र के मिलने के बाद आगामी कार्रवाई की जा सके। पत्र में पियरे जेनरे ने पत्रकार संतोष घोष को बताया कि उनके लिखे लेख में पंजाब यूनिवर्सिटी स्थित गांधी भवन के डिजाइनर का नाम गलत लिखा गया है।
उन्होंने बताया कि लेख में लिखा है कि पीयू के गांधी भवन को बीपी माथुर ने डिजाइन किया है, जबकि गांधी भवन को बीपी माथुर नहीं उन्होंने डिजाइन किया है। उन्होंने अगले लेख में इस भूल को सुधारने की भी बात लिखी। इस पत्र पर पियरे जेनरे के हस्ताक्षर भी हैं। जिसकी स्पेन में ‘ऑटोग्राफ ऑक्शन’ में नीलामी की गई। हेरिटेज आइटम प्रोटेक्शन सेल के सदस्य अजय जग्गा ने प्रशासक वीपी सिंह बदनौर और सलाहकार मनोज परिदा को इस नीलामी की जानकारी दी है।
उन्होंने कहा है कि चंडीगढ़ में ऐसे कई दस्तावेज हैं, जिनमें पियरे जेनरे के हस्ताक्षर हैं। इस तरह के सभी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने और संरक्षित करने की आवश्यकता है, क्योंकि इन्हें ‘गोल्ड माइन’ माना जाता है और ऑटोग्राफ की श्रेणी के तहत अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी काफी कीमत है। गौरतलब है कि ली कार्बूजिए के साथ चंडीगढ़ को व्यवस्थित और खूबसूरत बनाने में उनके कजन पियरे जेनरे का भी अहम रोल रहा है।