चंडीगढ़। पीजीआई ने रोगी कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हिमकेयर के साथ समझौते पत्र पर हस्ताक्षर किया है। इसके अंतर्गत अब हिमकेयर के लाभार्थियों को पीजीआई में कैशलेस उपचार मिल सकेगा। हिमाचल प्रदेश ने प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार प्रदान करने के लिए 1 जनवरी 2019 से हिमकेयर योजना शुरू की थी। इस योजना में हिमाचल प्रदेश से प्रति वर्ष औसतन 4 स 5 हजार मरीजों को पीजीआई में इलाज की सुविधा प्राप्त हो रही है। पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल और डीडीए पंकज राय व चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विपिन कौशल की उपस्थिति में दोनों संस्थाओं के अधिकारियों ने समझौते पत्र पर हस्ताक्षर किया। प्रो. विवेक लाल ने कहा कि हिमकेयर के साथ हमारी साझेदारी के माध्यम से और कैशलेस उपचार पहल के कार्यान्वयन से हम पहुंच और सामर्थ्य बढ़ाने के लिए तैयार हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि वित्तीय बाधाओं के कारण किसी भी मरीज को उस देखभाल से वंचित न किया जाए जिसके वे हकदार हैं। वहीं, डीडीए पंकज राय ने कहा कि योजना के तहत प्रतिपूर्ति की पूरी प्रक्रिया बहुत बोझिल और समय लेने वाली थी। इसमें प्रतिपूर्ति में कम से कम चार-पांच महीने लगते थे। इस समस्या को दूर करने के लिए आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की तर्ज पर कैशलेस सुविधा प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।
अब प्रमाण पत्र और बिल का चक्कर नहीं
डीडीए ने बताया कि अब प्रतिपूर्ति के लिए उपचार अनुमान प्रमाण पत्र या बिल प्राप्त करने और जमा करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। लाभार्थी को इलाज के लिए काउंटर पर केवल हिमकेयर कार्ड जमा करना होगा और पीजीआई द्वारा कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की जाएगी। हिमाचल प्रदेश राज्य सरकार पूर्व निर्धारित पैकेज दरों के आधार पर पीजीआई चंडीगढ़ को राशि की प्रतिपूर्ति करेगी।