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PGI: ओपीडी के मरीजों में चौंकाने वाला इजाफा

Tue, 10 Mar 2015 03:34 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पीजीआई की न्यू ओपीडी में फिर से सवा लाख मरीजों का बोझ बढ़ गया है। साल 2014 में ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या 21 लाख 28 हजार तक पहुंच गई थी। वर्ष 2013 में मरीजों की संख्या करीब 20 लाख थी, जबकि साल 2012 में 18 लाख। मरीज बढ़ने का सिलसिला अब भी जारी है।
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लोड बढ़ने से डॉक्टरों के साथ पेशेंट की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। मरीजों को न तो ढंग से इलाज मिल पा रहा है और न ही सहूलियत। घंटों कतार में खड़ा होना पड़ता है। कई मरीजों का जब तक  नंबर आता है, तब तक डॉक्टर के जाने का समय हो जाता है। ऐसे में कई मरीजों को ओपीडी में चेकअप के लिए दोबारा से नंबर लगाना पड़ता है।

भीड़ के कारण पांच बजे तक ओपीडी
मरीजों की संख्या बढ़ने से कई ओपीडी का समय भी बढ़ता जा रहा है। कई डिपार्टमेंट की ओपीडी शाम पांच बजे तक चलती है। इनमें मुख्य रूप से डायबिटीज, कैंसर, इंटरनल मेडिसिन, लीवर, गेस्ट्रो डिपार्टमेंट की ओपीडी शामिल हैं। इसके अलावा कुछ ओपीडी दोपहर बाद तीन से चार बजे तक चलती है। इनमें मुख्य रूप से न्यूरोलॉजी, गायनी और पीडियाट्रिक ओपीडी शामिल हैं। इन सभी ओपीडी का समय सुबह नौ बजे से ही शुरू होता है।
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खड़े होने तक की जगह नहीं
मरीजों की भीड़ इतनी बढ़ गई है कि उन्हें बैठने के लिए सीट नहीं मिलती। खड़े होने के लिए भी जगह ढूंढनी पड़ती है। हालात ऐसे होते हैं कि कमरों में जाने के लिए डॉक्टरों को भी बड़ी मुश्किल से जगह मिलती है।
चंडीगढ़ से बाहर आने वाले मरीजों को सुबह चार-पांच बजे ही पीजीआई के लिए निकलना पड़ता है और वे ओपीडी में चेकअप कराकर चार बजे के बाद ही निकल पाते हैं।

इस पर पड़ रहा है असर
1.गर्मियों में सांस लेने में दिक्कत आती है
2.लैब टेक्नीशियनों व दूसरे कर्मचारियों पर लोड बढ़ रहा है
3.अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई की वेटिंग बढ़ रही है
4.ऑपरेशन की वेटिंग लिस्ट में इजाफा हो रहा है
5.संक्रमण भी तेजी से बढ़ रहा है
6. मरीज का चेकअप सही से नहीं हो पाता है

अन्य अस्पतालों में व्यवस्था सुधरे तो मिलेगी राहत
पीजीआई फेकल्टी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. वीरेंद्र सिंह का कहना है कि आसपास के इलाके में यदि अस्पताल की व्यवस्था सुधरे तो पीजीआई में भीड़ काफी हद तक कम हो सकती है।
अस्पतालों में डॉक्टरों की संख्या बढ़ानी चाहिए। इसके लिए पीजीआई को भी आसपास के स्टेट पर दबाव बनाना चाहिए, ताकि पीजीआई में आने वाले मरीजों को क्वालिटी ट्रीटमेंट मिल सके।
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