चंडीगढ़। पीजीआई के डॉक्टरों की टीम ने पहली बार एंट्री न्यूट्रॉफिलिक साइटोप्लास्मिक ऑटो (एएनसीए) एंटीबॉडी से जुड़े वैस्कुलाइटिस के इलाज के लिए लागत प्रभावी उपचार संबंधी दिशा-निर्देश जारी किया है। यह दिशा-निर्देश इन मरीजों के इलाज के लिए भारत में तैयार किया गया अब तक का पहला दिशा-निर्देश है। वहीं, अच्छी खबर यह है कि यह भारत की ही तरह दक्षिण एशिया के अन्य देशों के मरीजों के लिए भी कारगर साबित होगा। पीजीआई की इस उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय जनरल ऑटो इम्युनिटी रिव्यूज में प्रकाशित किया गया है। पीजीआई के इंटरनल मेडिसिन विभाग के क्लिनिकल इम्युनोलॉजी और रूमेटोलॉजी सर्विसेज के प्रो. अमन शर्मा के नेतृत्व में देश के अलग-अलग चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों के समूह ने मिलकर इसे पूरा किया है जिसे भारतीय रूमेटोलॉजी एसोसिएशन के दिशा-निर्देश के रूप में विकसित किया गया है। प्रो. अमन शर्मा ने बताया कि पीजीआई के पास इन मरीजों के प्रबंधन में व्यापक अनुभव है क्योंकि पिछले दो दशकों में 500 से अधिक ऐसे रोगियों को देखा गया है। उन्होंने बताया कि इस दिशा-निर्देश को तैयार करने में पीजीआई के डॉ. शंकर नायडू और संस्थान के पूर्व छात्र डॉ. आधार धुरिया के साथ मिलकर काम किया गया है। समूह के अन्य विशेषज्ञों में एसजीपीजीआई लखनऊ के प्रो. विकास अग्रवाल, एम्स नई दिल्ली की प्रो. उमा कुमार, हिंदुजा हॉस्पिटल मुंबई के डॉ. सी बालकृष्ण, सेंट जॉन्स बंगलूरू की प्रो. विनीत शर्मा भी शामिल हैं।
4 वर्षों की मेहनत का परिणाम : प्रो. अमन शर्मा ने बताया कि तैयार किए गए भारतीय दिशा निर्देशों में प्रबंधन के लिए जांच और दवाइयां शामिल की गई हैं। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता मिलने से पहले टीम को दिशा-निर्देश पर सख्ती से काम करने में लगभग 4 वर्ष लग गए। उन्होंने बताया कि दिशा-निर्देश में भारत में उपलब्ध उपचार पद्धतियों को शामिल करने, लागत संबंधी बिंदुओं को ध्यान में रखने और भारतीय संदर्भ में सबसे उपयुक्त होने के लिए तैयार किए गए हैं। यह दिशा-निर्देश दक्षिण एशियाई देशों और दुनिया भर के अन्य विकासशील देशों के लिए भी बेहद उपयुक्त साबित होंगे।