50 घंटे बाद डाक्टरों ने हड़ताल ली वापस
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पीजीआई के रेजिडेंट डाक्टरों ने 50 घंटे बाद हड़ताल वापस लेने का फैसला लिया है। पीजीआई प्रशासन ने रेजिडेंट डाक्टरों की कुछ मांगें तत्काल मान ली हैं और कुछ के लिए थोड़ा समय मांगा है। रेजिडेंट डाक्टरों की मुख्य मांगों में इमरजेंसी में ट्राइज सिस्टम (गंभीर रोगियों को पहले चिकित्सा देने की विधि) लागू करना, इमरजेंसी व ट्रामा में काम करने वाले डाक्टरों को सुरक्षा और मरीजों के ब्लड सैंपल न लेने जैसे मुद्दे शामिल थे।
पीजीआई प्रशासन ने कहा कि इमरजेंसी में अस्थाई ट्राइज सिस्टम बुधवार से बना दिया जाएगा। डाक्टरों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई, लेकिन पेंच सैंपलिंग पर फंस गया। पीजीआई ने कहा कि सैंपलिंग का काम तत्काल नहीं रोका जा सकता, लेकिन काम का बोझ कम करने के लिए छह फेब्टोमिस्ट की नियुक्ति तुरंत कर दी जाती है।
रेजिडेंट डाक्टरों का एक गुट देर रात इस बात पर अड़ा रहा कि उनसे सैंपलिंग लेने का काम तत्काल बंद किया जाए। यदि ऐसा नहीं होता तो हड़ताल जारी रहेगी। एसोसिएशन आफ रेजिडेंट डाक्टर्स (एआरडी) के प्रेसिडेंट डा. एसके रेड्डी और उनके साथियों ने नाराज डाक्टरों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। देर रात करीब 11 बजे डाक्टरों ने कहा कि वे पीजीआई और एआरडी को 31 अगस्त तक समय देते हैं। उसके बाद रेजिडेंट डाक्टर सैंपलिंग नहीं करेंगे। रेड्डी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनकी मांग 31 अगस्त तक पूरी हो जाएगी। उसके बाद डाक्टरों ने हड़ताल वापस लेने का फैसला लिया। बुधवार से ओपीडी में काम सुचारु रूप से चलेगा।
रविवार रात नौ बजे से काम था प्रभावित
PGI Strike
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रविवार रात लुधियाना की हरजिंदर कौर की पीजीआई इमरजेंसी में मौत हो गई थी। आरोप था कि रेजिडेंट डॉक्टरों ने उनके इलाज में लापरवाही बरती। इससे गुस्साए हरजिंदर कौर के बेटे हरप्रीत ने डॉक्टर मणि को पीट दिया था। इससे रेजिडेंट डॉक्टर नाराज हो गए थे। डाक्टरों का मानना था कि यदि ऐसे हालात रहे तो रोज पिटते रहेंगे। इसमें मरीजों का कोई दोष नहीं है। खामियां तो सिस्टम में है। सिस्टम को सुधारने और मरीजों को अच्छा इलाज के लिए इसलिए इस तरह के कदम उठाने पड़ रहे हैं।
देर रात रेजिडेंट डाक्टर दो फाड़ हुए
पीजीआई प्रशासन से बातचीत होने के बाद डाक्टरों में दो फाड़ हो गई। एक गुट का मानना था कि उनकी दो प्रमुख मांग ट्राइज सिस्टम और सुरक्षा पर जब सहमति बन चुकी थी और सैंपलिंग का काम भी आगे बंद होने का आश्वासन दिया जा चुका है तो हड़ताल को आगे बढ़ाने का कोई फायदा नहीं है। डाक्टरों को काम पर लौट जाना चाहिए, जबकि दूसरा गुट इस बात पर अड़ा रहा कि यदि आज मांगें नहीं मानी गईं तो सभी आश्वासन धरे के धरे रह जाएंगे। पहले भी कई बार आश्वासन दिए जा चुके हैं। उनकी मांगे साल 2013 से पेडिंग हैं, लेकिन देर रात प्रेसिडेंट रेड्डी सभी डाक्टरों को समझाने पर सफल रहे।
इमरजेंसी से सेवाएं वापस लेने की चेतावनी दी
PGI Strike
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मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति पर हड़ताली डाक्टरों ने इमरजेंसी ठप करने की चेतावनी दी थी। उन्होंने पीजीआई प्रशासन को नोटिस दिया कि यदि उनकी मांगें शाम पांच बजे तक नहीं मानी जाती हैं तो वे अपनी सेवाएं इमरजेंसी से भी वापस ले लेंगे।
इसकी सूचना मिलते ही पीजीआई प्रशासन ने सभी एचओडी की मीटिंग बुलाई और सीनियर डाक्टरों की ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए। एचओडी ने डाक्टरों के रोटेशन भी तैयार कर लिए। शाम को पीजीआई प्रशासन ने हड़ताली डाक्टरों को बातचीत के लिए भी बुला लिया। शाम चार बजे शुरू हुई मीटिंग शाम साढ़े सात बजे तक चलती रही।
ओपीडी में सिर्फ 3900 मरीजों का इलाज
हड़ताल की एक दिन पहले सूचना मिल जाने से आधे मरीज पीजीआई नहीं आए। सिर्फ 3900 मरीज आए थे। पीजीआई प्रशासन ने भी सिर्फ नौ बजे तक मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया। हालांकि इसके बावजूद कई मरीज परेशान दिखे। उन्हें हड़ताल के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी थी।
लुधियाना से आए सुखी ने बताया कि मंगलवार को डाक्टर को उन्हें आपरेशन की तारीख देनी थी, लेकिन कोई भी डाक्टर उसे नहीं मिला। बरनाला से आए गुरमुख ने बताया कि उन्हें न्यूरोलाजी में दिखाना था। उन्हें हड़ताल की कोई जानकारी नहीं मिली। यहां आकर पता चला। अब दोबारा आना पड़ेगा। पीजीआई की ओपीडी में रोजाना दस हजार मरीज आते हैं, लेकिन हड़ताल की वजह से तीन से चार हजार मरीज आ रहे हैं।