पीजीआई चंडीगढ़ के नेहरू एक्सटेंशन ब्लॉक में बनाए कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल को 100 दिन हो गए। 30 मार्च को वहां कोरोना का पहला मरीज भर्ती किया गया था। इन 100 दिनों में कोरोना के 200 से ज्यादा मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं। चंडीगढ़ के अलावा देश के अन्य प्रदेशों व शहरों के मरीजों को इलाज मिला है।
पीजीआई प्रशासन का कहना है कि महामारी के दौर में इमरजेंसी, ट्रामा सेंटर के संचालन के साथ अलग से 250 बेड का हॉस्पिटल बनाया जाना बेहद कठिन काम था, लेकिन सरकार के निर्देशानुसार उसे तय समय में पूरा कर लिया गया। अस्पताल को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस करने के साथ ही संक्रमण मुक्त बनाया गया है।
वहां मरीजों के लिए प्रथम चरण से लेकर डिस्चार्ज होने तक अलग-अलग स्तर पर व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे डॉक्टर और पीजीआई के स्टाफ को संक्रमण का खतरा न रहे। 250 बेड के अस्पताल में 30 बेड का आईसीयू बनाया गया है, जहां कोरोना के गंभीर मरीजों को इलाज दिया जा रहा है।
अब तक 205 मरीज ठीक होकर लौटे घर
हॉस्पिटल में अब तक देशभर के 256 पॉजिटिव मरीजों को भर्ती किया जा चुका है। उनमें से 205 मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं। यहां 100 दिनों के अंदर भर्ती किए गए मरीजों में 156 पुरुष और 110 महिलाएं शामिल हैं।
इनमें से 61 मरीजों की रिपीट टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उन्हें डिस्चार्ज किया गया है, जबकि नई गाइडलाइन के मानकों के तहत 144 मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं। वहीं, यहां पर अब तक कोरोना के 10 मरीजों की मौत हो चुकी है। पीजीआई के कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल का रिकवरी रेट 81 प्रतिशत है।
चंडीगढ़ से महाराष्ट्र तक के मरीजों को मिल रहा इलाज
देशभर में कोरोना के बढ़ते मरीजों को देखते हुए चंडीगढ़ में एक अलग अस्पताल बनाने का निर्णय लिया गया, जिसे 30 मार्च को पूरा कर मरीजों को भर्ती का क्रम शुरू हो गया। पीजीआई के कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल में इन 100 दिनों में चंडीगढ़ से लेकर महाराष्ट्र तक के कोरोना के मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया है। इनमें चंडीगढ़ के 176, पंजाब के 42, हरियाणा के 23, दूसरे प्रदेशों के 13, दिल्ली के दो, यूपी के 6, हिमाचल प्रदेश के तीन, जम्मू कश्मीर का एक और महाराष्ट्र का एक कोरोना का मरीज शामिल है।
एक माह से 80 साल तक के मरीज को मिला इलाज
कोरोना के मरीजों के लिए तैयार खास अस्पताल में एक माह से लेकर 80 साल तक के कोरोना के मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा चुका है। यहां सबसे कम दिन रहने वाला मरीज 17 दिनों में ठीक होकर घर लौटा है, वहीं सबसे ज्यादा दिनों तक रहने वाला मरीज 39 दिनों में कोरोना को मात देकर निगेटिव हुआ है। कोरोना पॉजिटिव एक मरीज को इलाज के दौरान पेसमेकर लगाया गया है, जबकि किडनी संबंधी 12 मरीजों को कोरोना के इलाज के साथ ही वहां डायलिसिस दी गई है।
प्लाज्मा थैरेपी से 5 को मिला नया जीवन
कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल में भर्ती कोरोना के पांच गंभीर मरीजों को प्लाज्मा थैरेपी से ठीक किया जा चुका है। कोरोना के ठीक हो चुके गंभीर मरीजों को मोटिवेट कर उनसे प्लाज्मा दान में लेना और फिर पीजीआई में भर्ती गंभीर मरीजों को उससे थैरेपी देकर नया जीवन देना वाकई एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
पीजीआई में कोरोना के मरीजों के लिए अलग से 250 बेड का अस्पताल बनाना आसान नहीं था, लेकिन डॉक्टरों और स्टाफ की मेहनत ने मिलकर चंद दिनों में साकार कर दिखाया। पीजीआई के टीमवर्क और मेहनत का ही परिणाम है कि 100 दिन में 200 से ज्यादा मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं। कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल को और मजबूती देने का प्रयास लगातार जारी है, ताकि कोरोना पर जीत संभव हो पाए।
- डॉ. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई चंडीगढ़