विवाद 10 अगस्त से चंडीगढ़-हरियाणा में विवाद शुरू हुआ था, जब सीटीयू यूनियन के सदस्यों को पता चला कि पंचकूला ने पीजीआई के लिए लोकल बस सेवा शुरु की है। 11 अगस्त को सेक्टर-16 के रोज गार्डन के पास सीटीयू की यूनियन ने बस को रोक दिया और एसटीए ने चालान काटने के साथ बस को जब्त कर लिया। इसके बाद से चंडीगढ़-पंचकूला में ठन गई।
पंचकूला और कालका से पीजीआई के चल रही इलेक्ट्रिक बस को रोकने से हरियाणा ने तीसरी बार मना कर दिया है। इस बार हरियाणा ट्रांसपोर्ट विभाग ने चंडीगढ़ के स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की मंशा पर ही सवाल उठा दिए हैं।
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चंडीगढ़ की तरफ से तीसरी बार लिखे पत्र पर जवाब देते हुए हरियाणा ने लिखा कि चंडीगढ़ में कई निजी कंपनियों की बसें चल रही हैं। कई स्टॉपेज बनाए हुए हैं। क्या एसटीए ने उन पर कार्रवाई की है। साथ ही कहा है कि पीजीआई तक जाने वाली ई-बस जारी रहेगी।
एक माह से बना है विवाद
यूटी प्रशासन के एसटीए और हरियाणा के एससीबीएसएल के बीच पिछले करीब एक महीने से विवाद बना हुआ है। कालका और पंचकूला से पीजीआई के लिए हरियाणा की तरफ से रोजाना ई-बसें चलाई जा रही हैं। यूटी प्रशासन ने इसे अवैध बताया है और रोकने के लिए तीन बार पत्र लिख चुका है। हर बार जवाब में हरियाणा ने बस रोकने से मना किया है।
एसटीए को भेजे तीसरे पत्र में एससीबीएसएल के सीईओ ने एसटीए की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए। पत्र में लिखा कि कई प्राइवेट ऑपरेटर जैसे, निओगो, बालाजी बस सर्विस, विजय बस सर्विस, गजराज बस सर्विस आदि अन्य राज्यों और शहरों से चंडीगढ़ के अंदर बस चला रहे हैं। यह शहर के अलग-अलग जगह पर सवारियों को बिठाते और उतारते हैं। पत्र में लिखा है कि यह सबको पता है कि निओगो नाम की इलेक्ट्रिक बस आईएसबीटी-43, ट्रिब्यून चौक और आईएसबीटी-17 के सामने भी रुकती हैं। यहां पर सवारियों को बैठाया जाता है और उतारा जाता है। क्या जिस नियमों का हवाला देकर हरियाणा की ई-बस को रोका जा रहा है। क्या उन्हीं नियमों के तहत इस निजी बस का चालान किया गया है।
साथ ही लिखा है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) की गाइडलाइन्स के अनुसार ई-बसों को परमिट से छूट प्राप्त है, इसलिए हरियाणा कि बस पीजीआई के लिए जारी रहेगी। चंडीगढ़ की तरफ से इसे अवैध तरीके से न रोका जाए और न ही चालान किया जाए।
हरियाणा ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि कालका-पिंजौर से पीजीआई के लिए जो बस चल रही है, वो स्टेज कैरिज नहीं बल्कि कॉन्ट्रैक्ट कैरिज है क्योंकि कालका-पिंजौर से बस में बैठने वाली सवारियों से फिक्स 60 रुपये किराया वसूला जाता है, जबकि स्टेज कैरिज में बसें कई स्टॉप पर रुकती हैं और सवारियों को बिठाती और उतारती हैं।
नाम न छापने की शर्त पर परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्पष्टीकरण के लिए मोर्थ को मामला भेजा गया है। जवाब का इंतजार किया जा रहा है। वहीं, एसटीए के अधिकारी पिछले कई दिनों से नो कमेंट्स ही कह रहे हैं। हालांकि, एसटीए हरियाणा को चौथा पत्र भेजने की तैयारी में है। चंडीगढ़ गवर्नमेंट ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन के महासचिव सतिंदर सिंह ने कहा कि अवैध बसों के खिलाफ एक बार प्रदर्शन कर चुके हैं। एसटीए के आश्वासन पर उनके रुख का इंतजार कर रहे हैं। अगर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है तो फिर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
एसटीए के तीन पत्रों का असर नहीं, 10 अगस्त से चल रही बस
यूटी परिवहन विभाग के अधिकारियों का भी मानना है कि नियमों के हिसाब से लोकल रूट पर अन्य कोई बस नहीं चला सकता। एसटीए तीन बार हरियाणा को बस रोकने के लिए लिख चुका हैं लेकिन कोई असर नहीं पड़ा।