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पीजी आग मामला: 16 छात्राओं की हाईकोर्ट में याचिका दायर ,पीजी के खिलाफ कार्रवाइ पर रोक लगाएं

Wed, 18 Mar 2020 12:26 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
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चंडीगढ़ सेक्टर-32 के पेइंग गेस्ट (पीजी) में 22 फरवरी को लगी आग में तीन युवतियों की मृत्यु के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर में गैर पंजीकृत पीजी के खिलाफ हो रही कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए कई छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
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छात्रों ने कहा है कि जल्द ही उनकी परीक्षाएं शुरू होने जा रही हैं, ऐसे में प्रशासन पीजी को बंद कर छात्रों को वहां से बाहर कर रहा है, उस पर रोक लगाई जाए। जस्टिस राजन गुप्ता एवं जस्टिस करमजीत सिंह की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए चंडीगढ़ प्रशासन, चंडीगढ़ के डीसी और एस्टेट अफसर को 23 मार्च के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है ।

हाईकोर्ट में यह याचिका देवांगनी भारद्वाज सहित 15 अन्य छात्राओं द्वारा सीनियर एडवोकेट वीके जिंदल और अक्षय जिंदल के जरिए दायर की गई है। सीनियर एडवोकेट वीके जिंदल ने हाईकोर्ट को बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन ने गेस्ट हाउस और पीजी के रजिस्ट्रेशन के लिए साल 2006 में एक नीति लागु की थी। लेकिन शहर में 2000 में से केवल 25 गेस्ट हाउस और पीजी ने रजिस्ट्रेशन करवाया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि प्रशासन ने अपनी ही नीति को लागू करने की कभी जरूरत नहीं समझी।
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नए सिरे से पीजी को लेकर नीति बनाए जाने की हाईकोर्ट से की मांग
छात्राओं ने चंडीगढ़ में पीजी को लेकर नए सिरे से नीति बनाने की मांग की है और नीति बनाते समय सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाए, तभी एक ठोस नीति तैयार की जा सकेगी और उसे बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।  क्योंकि वर्ष 2006 में बनी नीति को 14 वर्षों तक सही तरीके से लागू ही नहीं किया जा सका है। यह नीति ऐसी है, जिसमें आवेदन से लेकर रजिस्ट्रेशन तक एक लंबी प्रक्रिया बना दी गई है।
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बगैर नोटिस दिए एक झटके में पीजी से बाहर कर दिए गए विद्यार्थी

हाईकोर्ट को बताया गया कि 22 फरवरी को जब सेक्टर-32 के एक पीजी में आग लगने से तीन छात्राओं की मौत हो गई, तब जाकर प्रशासन ने आनन-फानन में शहर के सभी पीजी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी और उन्हें बंद कर दिया गया। और एक झटके में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को बाहर कर दिया गया।

याचिका में बताया गया कि चंडीगढ़ में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से बच्चे पढ़ने आते हैं जो ज्यादातर पीजी में ही रहते हैं। प्रशासन ने पीजी को बंद करने से पहले एक बार भी कोई नोटिस नहीं दिया और यह तक नहीं सोचा कि उनमें रहने वाले छात्र और छात्राएं कहां जाएंगे। 

छात्राओं ने कहा है कि जल्द ही उनकी वार्षिक परीक्षाएं शुरू होने जा रही हैं। उन्हें डर हैं कि अन्य पीजी में रह रही छात्राओं को भी बाहर न कर दिया जाए। ऐसे में उनकी पढ़ाई का काफी नुकसान होगा। लिहाजा हाईकोर्ट प्रशासन पीजी पर हो रही करवाई पर रोक लगाने के आदेश दे।
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