चंडीगढ़। जिला अदालत में शुक्रवार को जेपी कंपनी को गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट पर स्टे देने के मामले में सुनवाई हुई। जेपी कंपनी ने अदालत के आदेश की अवहेलना करने पर नगर निगम के खिलाफ एक और याचिका दायर की है।
याचिका में आरोप है कि अदालत के स्टे देने बावजूद नगर निगम ने जबरदस्ती प्लाट पर कब्जा लिया। पिछली सुनवाई पर जेपी कंपनी ने आईपीसी की धारा 17 के तहत आवेदन दायर किया था। इस धारा के अनुसार यदि कोई संपत्ति से संबंध रखता है तो उसे उस संपत्ति से संबंधित दस्तावेज पेश करने अनिवार्य हैं। कोरोना वायरस का हवाला देते हुए जेपी कंपनी दस्तावेज पेश नहीं कर पाई, जिसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई को 19 अगस्त के लिए स्थगित कर दिया है।जेपी कंपनी के पक्ष रखने के बाद नगर निगम की तरफ से जवाब दायर किया जाएगा।
बता दें कि नगर निगम ने जेपी गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट के स्टे ऑर्डर के खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की थी। जेपी प्लांट के अधिकारियों ने कहा कि सुनवाई के बाद जो आदेश होगा, उसके बाद आगे की योजना तय की जाएगी। निगम ने प्लांट में अपने कर्मचारी लगाकर कचरा प्रोसेसिंग का काम भी शुरू करा दिया था।
दूसरी ओर, कंपनी के अधिकारी जिला अदालत से स्टे ऑर्डर ले आए। इसमें कंपनी को एक माह का समय देने का आदेश दिया गया था। हालांकि, कंपनी के अधिकारी स्टे होने की बात कहते रहे, लेकिन निगम के अधिकारियों ने कहा कि लिखित आदेश न आने तक हम किसी भी बात पर विश्वास नहीं करेंगे। कंपनी के अधिकारी निगम पर अदालत की अवमानना का भी आरोप लगा रहे हैं। नगर निगम ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि जेपी कंपनी अनुबंध के अनुरूप काम नहीं कर रही थी। इसलिए एनजीटी के निर्देशानुसार प्लांट को कब्जे में लिया गया। कब्जा लेने के बाद कंपनी को स्टे देना ठीक नहीं है। क्योंकि भविष्य में लगने वाला जुर्माना निगम को भरना है न कि कंपनी को।