हरियाणा में पेंशनर्स कर्मचारियों की मृत्यु के बाद पुनर्विवाह करने के बावजूद विधवा पेंशन की हकदार होंगी। यह लाभ विधवा को तभी मिलेगा जब पूर्व में उसका कोई संतान न हो। सरकार ने पेंशन नियमों में सरलीकरण करते हुए पेंशन पेमेंट आर्डर (पीपीओ) में बड़ा बदलाव किया है। अगर किसी पेंशनधारक की मृत्यु होने पर उसकी पत्नी पुनर्विवाह कर लेती है तो उसे पेंशन मिलेगी, बशर्ते कोई संतान नहीं होना चाहिए।
अगर पेंशनर्स का कोई स्थायी रूप से विकलांग बच्चा जीवित हो तो वह पत्नी के स्थान पर आजीवन पेंशन का पात्र होगा। अगर स्थायी रूप से विकलांग बच्चा नहीं है या पेंशन के लिए कोई और पात्र नहीं है तो मृतक के आश्रितों यानी अभिभावकों को पेंशन मिलेगी। अगर अभिभावक नहीं है तो मृतक कर्मी के ऐसे भाई या बहन पेंशन के हकदार होंगे जो स्थायी दिव्यांग हो। हरियाणा वित्त विभाग ने यह निर्णय लेते हुए सभी विभागों के अध्यक्ष, मंडलायुक्तों, डीसी व पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को नए नियम लागू करने के निर्देश दिए हैं।
नए रिटायर होने वाले कर्मचारियों के पेंशन पेमेंट आर्डर में पेंशनधारक के अलावा अन्य सभी पात्रों का ब्योरा शामिल करना होगा। पुराने मामलों में कोई नया पीपीओ जारी करने की जरूरत नहीं है, वित्त विभाग के आदेश ही पेंशन वितरण प्राधिकरण के लिए काफी होंगे। हरियाणा ने यह निर्णय केंद्र के निर्देशों पर लिया है। पीपीओ में पेंशन धारक के अलावा अन्य पात्रों का जिक्र ना होने पर कर्मचारी की मृत्यु के बाद पेंशन लगाने में दिक्कत आती थी। इस संबंध में सरकार के समक्ष कई प्रस्तुतीकरण आए थे जिन्हें संज्ञान में लेते हुए वित्त विभाग ने यह निर्देश जारी किए हैं।