चंडीगढ़। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी (पेक) विद्यार्थियों को इस बार परिणाम के रूप में ग्रेड नहीं देगा। केवल विद्यार्थियों को रिजल्ट में पास व फेल दिखाया जाएगा। सबसे कमजोर विद्यार्थियों को आई ग्रेड मिलेगा। इसका अर्थ है कि उनका सेमेस्टर अधूरा है। उन्हें परीक्षा में दोबारा बैठने का एक और मौका मिलेगा। इस प्रस्ताव पर पेक की सीनेट ने मुहर लगा दी है। अब पेक प्रशासन विद्यार्थियों की परीक्षाएं कराने की योजना बना रहा है। अगले माह में परीक्षा की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
कोरोना के कारण मार्च से पहले जो विद्यार्थी शिक्षा पा रहे थे उनकी परीक्षाएं होनी थीं, लेकिन यह नहीं हो पाई और लॉकडाउन बढ़ता चला गया। अप्रैल माह में एक प्रस्ताव तैयार किया गया कि विद्यार्थियों को ग्रेड की बजाय इस बार पास-फेल ही किया जाए, क्योंकि लॉकडाउन के कारण तमाम विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी पूरी तरह नहीं कर पाएंगे और उनका प्रदर्शन भी बेहतर नहीं हो पाएगा। यह खाका उसी समय तैयार किया गया था, लेकिन सीनेट की बैठक में इसे लाना था। सीनेट की मंजूरी के बाद ही इस पर काम होना था। अब पेक की सीनेट ने इस पर मुहर लगा दी है। विद्यार्थियों का प्रदर्शन बेहतर रहेगा तो उन्हें पास किया जाएगा और कमजोर रहा तो फेल। इससे भी कमजोर रहा तो उन्हें आई ग्रेड में लाया जाएगा। यह बीटेक व एमटेक दोनों पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के लिए होगा।
इनसेट--
पहले चरण में 400 विद्यार्थियों को बुलाएगा पेक
नवंबर या दिसंबर में आयोजित होने वाली परीक्षाओं के लिए प्रथम चरण में कैंपस में 400 विद्यार्थियों को बुलाया जाएगा। छात्र सुरक्षित तरीके से परीक्षा में भाग लेंगे। यह वह विद्यार्थी होंगे जो अपनी इच्छा से कैंपस पहुंचेंगे। पेक का कहना है कि 50 किमी के दायरे में 2500 से अधिक विद्यार्थी हैं जो अपने घरों पर रहते हैं। यह विद्यार्थी आसानी से कैंपस आ सकते हैं। तमाम छात्रों ने परीक्षा में शामिल होने की हामी भी भरी है। टुकड़ों में विद्यार्थियों को कैंपस बुलाया जाएगा ताकि कोरोना से सुरक्षा भी हो सके। जो विद्यार्थी परीक्षा देने के लिए कैंपस नहीं आ सकते हैं उनके लिए रास्ता निकाला जा रहा है। उनकी परीक्षाएं बाद में आयोजित की जा सकती हैं।
वर्जन---
इस बार विद्यार्थियों को ग्रेड नहीं दिया जाएगा। उनके परिणाम के सामने पास-फेल ही लिखा जाएगा। अधिक कमजोर विद्यार्थियों को आई ग्रेड में रखेंगे और उन्हें परीक्षा में बैठने का एक और मौका दिया जाएगा। इस प्रस्ताव पर सीनेट ने मुहर लगा दी है।
- प्रो. धीरज सांघी, निदेशक, पेक