पंजाब सरकार ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायकों को अप्रैल से सितंबर तक के मानदेय का भुगतान कर दिया गया है और भुगतान में देरी का कारण तकनीकी था।
इस पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि वह आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में छह महीने की देरी के लिए ब्याज देने पर 60 दिन के भीतर विचार कर निर्णय लें।
अदालत ने कहा कि एक कल्याणकारी राज्य को ऐसे मामलों में दूरदर्शिता के साथ कार्य करना चाहिए और किसी भी सुझाव को यांत्रिक तरीके से खारिज नहीं करना चाहिए।
हाईकोर्ट स्वत: संज्ञान में एक मामले की सुनवाई कर रहा था जिसमें अखबारों में छपी खबरों के आधार पर राज्य की 50 हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मानदेय न मिलने की समस्या उठाई गई थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि अप्रैल से सितंबर 2025 तक का मानदेय जारी कर दिया गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रति माह 4,500 रुपये और सहायिकाओं को 2,250 रुपये का भुगतान किया गया है।
मैपिंग में तकनीकी समस्या
देरी का कारण पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) पोर्टल पर सिंगल नोडल एजेंसी बैंक खाते के मैपिंग में तकनीकी समस्या बताया गया जो अब केंद्र सरकार के सहयोग से हल कर ली गई है। सरकार की ओर से दाखिल अनुपालन हलफनामे में कहा गया कि पंजाब के सभी 155 ब्लॉकों में पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से धनराशि जारी कर दी गई है और चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट अफसरों के माध्यम से भुगतान किया गया है। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि भुगतान में छह महीने की देरी से कार्यकर्ताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कोर्ट ने पूछा, क्या आपने यह सोचा है कि उन्हें विलंब से भुगतान के लिए ब्याज दिया जा सकता है? वरना वे फिर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी। खंडपीठ ने कहा कि चूंकि पंजाब एक कल्याणकारी राज्य है इसलिए उसे ऐसे मामलों में उचित ब्याज दर देने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।