फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh News: यात्री को नहीं दी फ्लाइट रद्द होने की जानकारी, अब भरना होगा हर्जाना

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। यात्री को फ्लाइट रद्द होने की जानकारी नहीं देने पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ब्रिटिश एयरवेज और यात्रा ऑनलाइन प्राइवेट लिमिटेड पर 15-15 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। साथ ही याचिकाकर्ता को केस खर्च के तौर पर 10 हजार रुपये अदा करने और टिकट के लिए दी गई 58708 रुपये की रकम को 9 प्रतिशत प्रतिवर्ष की ब्याज दर से लौटाने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन

चंडीगढ़ सेक्टर-16 निवासी डा. जीएस अरोड़ा ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में दी शिकायत में बताया था कि उनके बेटे को जिनेवा से लंदन होते हुए दिल्ली आना था। इस यात्रा के लिए उन्होंने यात्रा ऑनलाइन प्राइवेट लिमिटेड से 19 दिसंबर 2020 के लिए ब्रिटिश एयरवेज का टिकट बुक किया। आरोप के मुताबिक, जब उनका बेटा विराट अमग सिंह यात्रा के दिन जिनेवा हवाई अड्डे पर पहुंचा तो ब्रिटिश एयरवेज का काउंटर बंद मिला। यहां उसे बताया गया कि फ्लाइट रद्द कर दी गई है। यात्री ने आरोप लगाया कि फ्लाइट रद्द करने से पहले उन्हें जानकारी नहीं दी गई और न ही कंपनी की तरफ से उसके लिए कोई दूसरी फ्लाइट की व्यवस्था की गई, जिस वजह से उसे स्विटजरलैंड में महंगे खर्चे पर रुकना पड़ा। वहीं, टिकट की राशि रिफंड करने की मांग की गई, लेकिन कंपनी ने कई बार मांग करने पर भी राशि नहीं लौटाई।
मामले में ब्रिटिश एयरवेज की ओर से कहा गया कि फ्लाइट रद्द होने की सूचना जीडीएस के माध्यम से टिकट बुक करने वाली कंपनी यात्रा ऑनलाइन को दी गई थी और शिकायतकर्ता के बेटे के लिए उसी दिन के वैकल्पिक उड़ानों में समय बदलाव के साथ फिर से टिकट बुक किया गया था लेकिन वैकल्पिक बुकिंग के संबंध में यात्रा ऑनलाइन प्राइवेट लिमिटेड या शिकायतकर्ता की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला।
विज्ञापन

वहीं, टिकट बुक करने वाली कंपनी यात्रा ऑनलाइन प्राइवेट लिमिटेड ने अपने जवाब में कहा कि उनकी जिम्मेदारी टिकट बुक करने की थी। उनका एयरलाइंस के कामकाज में कोई हस्तक्षेप नहीं है। फ्लाइट रद्द होने या समय में बदलाव से संबंधित कोई भी मुद्दा उनका नहीं है। एयरलाइंस ने फ्लाइट रद्द करने की जानकारी भी उन्हें नहीं दी थी। ऐसे में शिकायत को खारिज करने की मांग की गई। तथ्यों और दलीलों को सुनने के बाद आयोग ने उक्त दोनों कंपनियों को सेवा में कोताही बरतने का दोषी माना और शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए दोनों कंपनियों को हर्जाना हर्जाना भरने के आदेश दिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें