उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से केवल 2 महीने के जीएसटी रिफंड में देरी हो जाने से प्रदेश सरकार वित्तीय स्तर पर घुटनों के बल आ गई है। ऐसे में सरकार का उस समय क्या हाल होगा जब रिफंड आना ही बंद हो जाएगा।
ढींढसा ने कहा कि केंद्र के सिर दोष मढ़कर और झूठा प्रचार करके सूबे की वित्तीय हालत में सुधार नहीं होगा, बल्कि सरकार को अपने खर्च घटाने के अलावा इस मुद्दे पर गंभीरता से काम करना होगा। उन्होंने कहा कि सूबे को दो साल में अपने पैरों पर खड़ा करने का विधानसभा में दावा करने वाले वित्त मंत्री अब हाथ खड़े कर गए हैं जबकि उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया कि कांग्रेस सरकार की कारगुजारी और जीएसटी उगाही की दर पूरे देश में सबसे खराब है। उन्होंने कहा कि यह रिकॉर्ड में दर्ज है कि पंजाब को साल 2019-20 के पहले पांच माह के दौरान जीएसटी उगाही में 44 फीसदी की गिरावट देखनी पड़ी है जबकि पूरे देश में यह गिरावट औसत 21 फीसदी है।